Saturday, March 14, 2026

ताटंक छंद- गीत खुशी के गाना है

ताटंक छंद -: "गीत खुशी के गाना है"
अब आया उत्कर्ष नवल नित, मिलकर दीप जलाना है।
पुलकित मन दुख भार भूलकर, गीत खुशी के गाना है।।

फूलों से पथ रोज़ सजाया, धैर्य हृदय में धारा है।
जब आँधी में दीप जलाया, तब जीवन उजियारा है।
निशि वासर तपकर खप जायें, तभी स्वर्ग सुख पाना है।
मन पुलकित दुख भार भूलकर, गीत खुशी के गाना है... 

सदमारग सत्कर्मों के पथ, तोड़ चले अंधियारे वो।
साहस का शृंगार हृदय में , जीवन शौर्य उतारे जो।। 
श्रम की बूंद-बूंद से सोना, अब हमको उपजाना है। 
मन पुलकित दुख भार भूलकर, गीत खुशी के गाना है।। 

संघर्षों की धूल झड़ी तो, भाग्य द्वार दौड़े आया।
जब दिन थे विपरीत याद है, धनिकों के कोड़े खाया।। 
अब तो कर्म किरण से जीवन, स्वर्ण सदृश दमकाना है। 
मन पुलकित दुख भार भूलकर, गीत खुशी के गाना है।।

डॉ.अशोक आकाश
बालोद छत्तीसगढ़
9755889199

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