मॉं कर्मा गुण रोज भज, निज मन मलिन उजार।
बरनऊ तैलिक वंश जसु, साहू शक्ति अपार।।
आरती
जय हो कर्मा मैय्या तेरी आरती उतारूँ।
आरती उतारूँ तुझ पर तन मन वारूँ।।
जय हो कर्मा मैय्या तेरी आरती उतारूँ...
झॉंसी में जनमी मैय्या, बहू नरवर की।
रतन अनमोल माईं, साहू सरोवर की।।
मैय्या तेरी बन्दगी में, जिन्दगी गुजारूँ...
जय हो कर्मा मैय्या तेरी आरती उतारूँ...
तैलिक वंश के मैय्या संकटमोचन।
नारी कुल तारक, साहू वंश विभूषण।।
पड़े हैं शरण तेरी, चरण पखारूँ...
जय हो कर्मा मैय्या तेरी आरती उतारूँ...
जिस घर होवे कर्मा मैय्या तेरी पूजा।
होवे सिध भगतन केे काज अजूबा।।
कर जोरे मैया तेरी मूरत निहारूँ...
जय हो कर्मा मैय्या तेरी आरती उतारूँ...
हे जगननी तू ही आदि भवानी।
लक्ष्मी सरस्वती दुर्गा भवानी।।
पार करो नैया मैय्या मन से पुकारूँ...
जय हो कर्मा मैय्या तेरी आरती उतारूँ...
रचयिता
डॉ.अशोक आकाश
दिनॉंक 14 अप्रेल 2013
No comments:
Post a Comment