Thursday, March 26, 2026

मनहरण घनाक्षरी- चतुर्थ कुष्मांडा

चतुर्थ दिवस न्यारी, कुष्माण्डा मैया जी प्यारी, 
अमृत कलश हाथ, लिये जग आती है। 
शूल पुष्प शंख धरे, बाघ की सवारी करे, 
भयातुर भगतों को, अभय दिलाती है।। 
दूध मखाना मॉं हिय, लागे अतिशय प्रिय, 
दुखी भगतों की टोली, चैन से सुलाती है। 
अशोक आकाश लेख, निशिचर वृंद देख,
मैया होती क्रुद्ध और, युद्ध को बुलाती है।। सृजन दिनॉंक
21/10/2025

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