दुख हर कर सुख शॉंति सदा ही, देती हो सौगात मॉं।।
नित कल्याण करे कल्याणी, मॉं दुर्गा अवतार है।
भक्त वत्सला माता करती, भक्तों का उद्धार है।।
चन्द्रदोष हर शॉंत करे मन, भ्रांति हरे दिन रात मॉं।
मातु शैलपुत्री प्रथम दिन, आती हो नवरात मॉं।।
सोहे शस्त्र त्रिशूल हाथ में, साधक के अनुकूल है।
बाम हस्त में कमल लिये हैं, मॉं ममता की मूल है।।
हिमगिरि पावन धाम विराजे, भगत नवाये माथ मॉं।
मातु शैलपुत्री प्रथम दिन, आती हो नवरात मॉं।।
माता सती शैलपुत्री बन, भय हरती जगदम्बिका।
दैहिक दैविक भौतिक हरती, त्रयी ताप त्रयंबिका।।
मन के सकल विकार भस्म कर, सर पर रख दो हाथ मॉं।
मातु शैलपुत्री प्रथम दिन, आती हो नवरात मॉं।।
सृजन दिनॉंक
23 सितंबर 2025
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