मनहरण घनाक्षरी
1
रूस वाली देखी रार, यूक्रेन में बार बार,
छोटा जान छेड़ दोगे, हठ भारी पड़ेगी।
धन शक्ति मान भज, एटम की धौंस तज ,
लौ की एक चिंगारी से, लंका जारि धरेगी।।
इजरायल-ईरान, ताने अस्त्र शस्त्र बाण,
घमंड की आँच देख, दुनिया क्या डरेगी।
बल की न भूल करो, चींटी भी कुबूल करो,
हाथी को भी सूँड़ चढ़, मौत बन छरेगी।।
2
पुतिन को देख हँसे, कीचड़ में खुद फँसे,
जेलेंस्की से जंग वाली, रीत तुम भूले हो।
घमंड उड़ान जारी, तंज खूब कसे भारी,
खुद बुने जाल बीच, फँसना कुबूले हो।
खामनेई संग अब, ठन गई जंग जब,
बातों वाले 'डोनाल्ड' जी, होश सब भूले हो।
दूसरों को सीख दई, अपनी न सुधि रही,
शेर तन आए अब, चूहा बन झूले हो।।
डॉ.अशोक आकाश
13/3/2026
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