Sunday, November 17, 2019

छत्तीसगढ़ राज्य स्तरीय सम्मान समारोह का आयोजन

सीपत बिलासपुर सम्मान समारोह कृति कला एवं साहित्य परिषद् सीपत बिलासपुर द्वारा जॉजी में छत्तीसगढ़ राज्य स्तरीय सम्मान समारोह का आयोजन 17 नवंबर 2019 दिन रविवार को किया गया | कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ.विनय कुमार पाठक पूर्व अध्यक्ष छत्तीसगढ़ राज भाषा आयोग रायपुर द्वारा की गई | उक्त आयोजन में साहित्य के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान पर मधुर साहित्य परिषद् जिला बालोद कोे "कृति साहित्य वृंद " से सम्मानित किया गया | काव्य पाठ प्रतियोगिता मे सर्वश्रेष्ठ प्रस्तुति पर मधुर साहित्य परिषद् तहसील डौंडी लोहारा अध्यक्ष कन्हैया लाल बारले की  "कृति सारस्वत सम्मान"  से सम्मानित किया गया | कार्यक्रम में मधुर साहित्य परिषद् जिला बालोद अध्यक्ष डॉ.अशोक आकाश, देवनारायण नगरिहा , कन्हैया लाल बारले, तोषण चुरेन्द्र, गुमान साहू, परमानंद प्रकाश,  लालेश्वर अरुणाभ उपस्थित रहे | मीर अली मीर रायपुर के विशेष आतिथ्य एवं शरद यादव अक्स के संचालन में कार्यक्रम स्वर्णिम सफल रहा |

कृति कला एवं साहित्य परिषद् सीपत बिलासपुर द्वारा जॉजी में छत्तीसगढ़ राज्य स्तरीय सम्मान समारोह का आयोजन 17 नवंबर 2019 दिन रविवार को किया गया | कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ.विनय कुमार पाठक पूर्व अध्यक्ष छत्तीसगढ़ राज भाषा आयोग रायपुर द्वारा की गई | उक्त आयोजन में साहित्य के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान पर मधुर साहित्य परिषद् जिला बालोद कोे "कृति साहित्य वृंद " से सम्मानित किया गया | काव्य पाठ प्रतियोगिता मे सर्वश्रेष्ठ प्रस्तुति पर मधुर साहित्य परिषद् तहसील डौंडी लोहारा अध्यक्ष कन्हैया लाल बारले की  "कृति सारस्वत सम्मान"  से सम्मानित किया गया | कार्यक्रम में मधुर साहित्य परिषद् जिला बालोद अध्यक्ष डॉ.अशोक आकाश, देवनारायण नगरिहा , कन्हैया लाल बारले, तोषण चुरेन्द्र, गुमान साहू, परमानंद प्रकाश,  लालेश्वर अरुणाभ उपस्थित रहे | मीर अली मीर रायपुर के विशेष आतिथ्य एवं शरद यादव अक्स के संचालन में कार्यक्रम स्वर्णिम सफल रहा |

Saturday, November 16, 2019

रज्जू भाग 5

(5)
     आज बारा बछर हेगे .....

   बड़े बिहनिया कोतवाल हा हॉका पारिस ---
   "आज हमर गॉव में सब काम धाम बंद हे , 12बजे पंचायत चौंक में सकेलात जाहू हो.....|
     सब कोई पूछे का होगे कोतवाल--"का बात बर गॉव बंद हे |"
कोतवाल कीहिस "में नई जानो उप्पर ले शासन के आदेश आय हे |"
   सब गॉव के मनखे पटेल कर गीस,सरपंच कर गीस,कोई ला कुछू नई मालूम, अतका भर पता चलीस कि हमर गॉव में बड़े जन साहब अवैया हे, पूरा गॉव भरके मन अगोरा करत  राहय, सब कोई सोचत राहय कोन साहब  होही |
      बेरा उत्ती बड़े बड़े मशीन गॉव के कच्ची सड़क ला  डामरीकरन करे ला आगे, 10 के बजत ले गॉव के कच्ची सड़क डामर के होगे,पूरा गॉव डामरे डामर महमहावथे, पंचायत के आगू के बिगड़हा बोरिंग बनगे, गौरा चॉवरा करा के बोरिंग में पंप फिट करके बीच गली के आवत ले चार पॉच जगा नल लगगे, वृक्षारोपण बर पौधा पटकागे, अब्बड़ अकन गड्ढा खनागे, पंचायत के आगू मंच तैयार होगे,पंडाल तनागे, अब्बड़ अकन कुर्सी सजगे, माइक बाजे लागिस ---"मेरे देश के धरती सोना उगले उगले हीरा मोती , मेरे देश के धरती.... "
       ग्यारा बजे अब्बड़ अकन कार आके पंचायत के आगू में रुकिस, पूरा गॉव सकेलागे, हमर गॉव में बड़े ज्जन साहब आगे .....सरपंच पटैल पंच मन हा  उतरते भार साहब मन के अगुवानी करीस | चमचमाती कार उतरैया मन तक सुट बूट में, पूरा गॉव खुसूर-फुसूर करे लगिस, फेर फूल माला देके सुवागत करैया मन ला वो साहब मन कहा दिस----
   "अरे हमन नो हन भैया बड़े साहब बाद में आही, हमन बेवस्था देखे बर आय हन |"
   अब पूरा गॉव के बेवस्था के निगरानी करे गीस --- बिजली, पानी, सड़क साफ सफाई सब चकाचक....... |
   पूरा गॉव के मन ये साहब अउ सबे विभाग के कर्मचारी मन के चाय पानी के व्यवस्था में लग गे | सवा ग्यारा बजे एक ठन अउ कार अइस, गॉव भर के मन अउ पहिली आय रीहिस ते साहब मन उत्ता_धुर्रा वो कार डाहन  दौंड़िन , गिरत हपटत वो साहब के कार के तीर में जावत ले कार में बैठे साहब हा कार रुके के पहिलिच दरवाजा खोल के उतरत गिर पड़ीस अउ पहिली ले आय साहब मन ला कीहिस -- "पागल हो तुमन इहॉ चाहा पीये ला आय हौ,मोला नौकरी ले निकलवा दुहू का.... गॉव के बहार में स्वागत गेट कोन बनवाही......|"अब सब कोई ला सुरता आइस,  टेंट वाले ला कहिके स्वागत गेट बनवाके ओमे सफेद कपड़ा के बेनर मे सुवागत हे कहिके लिखवाय गिस ......|
     अब तो पूरा गॉव आश्चर्य में पड़गे, हमर गॉव में ऐसन कोन साहब अवैया हे, जेकर बर हमर गॉव के अत्तिक साज सिंगार होवथे |
     ठीक बारा बजे मेन रोड ले गॉव के धरसा में नवॉ नवॉ बने सड़क डाहन आठ नौ ठन गाड़ी के काफिला मुड़िस, वॉऊं_वॉऊं,वॉऊं- वॉऊं गाड़ी के सायरन दुर्हिया ले गूंजगे, गाड़ी में बैठे मोर मन अपन बचपना के फोटो खिंचत रीहिस, जीवन के संघर्ष यात्रा में तपके निखरे रज्जू हमर जिला के कलेक्टर बन गेहे |

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                                         लेखक 
                                  डॉ.अशोक आकाश 
                  ग्राम कोहंगाटोला तह जिला बालोद छ.ग. 
                              मो. नं. 9755889199

रज्जू भाग 4

(4)

       परीक्षा के रिजल्ट आगे यहू साल रज्जू हा बढ़िया नंबर लइस, बिपत के बेरा में धीरज रखना चाही , जिनगी अमोल हे जवैया  हा चल दिस तब जीयैया ला अपन काम जरूर पूरा करना चाही | हाई स्कूल हा गॉव ले छै किलोमीटर दुर्हिया रीहिस, संगवारी मन संग जाके रज्जू नौवीं में भर्ती होगे | अब रोज बिहनिया अपन सबे काम ला करके स्कूल जाय अउ संझा घर आय तब सब काम बुता निपटाके पढ़े ल बैठे | हप्ता भर में रज्जू  करियागे, गौटनिन दाई सब ला जानत रीहिस रज्जू ला एक दिन कीहिस ---
      "जब ले मोर नोनी शिखा के बिहाव होय हे बेटी, ये साइकिल हा माड़े हे, आज ले तें इही में स्कूल जाबे , मन लगा के पढ़ बेटी अउ जिनगी के सुग्घर रद्दा गढ़ |"
    नवा टायर ,घंटी ,फुंदरा , तारा लगे चुक चुकले नवा दुलहिन बरोबर सजे साइकिल ला देखके रज्जू खुश होगे, फेर कीहिस --
    "एकर कोनो जरूरत नई हे दाई में तो दौंडत चल देथों तभोले बतादे एकर के पैसा दुहं |"
   तब गौटनिन दाई कीहिस ---"में कोनो बैपार करथों वो , तोला पैसा में दुहूं |" 
     अउ तीर में जाके ओकर मुड़ी में हाथ फेर के अपन छाती में ओधैस अउ कीहिस ---"माड़े माड़े सबे खराब होगे रीहिस बेटी तोरेच बर एला बनवाय हौं, लेजा एमा स्कूल जाबे तब मोरो मन माड़ही |"
तब रज्जू हा ओला पोटार के कीहिस ---"में हा तोर ये सब करजा ला कब छूटहूं दाई |"
     रज्जू बर साइकिल सूरज चंदा ले कम नई रीहिसे,जेकर सपना तक पहाड़ लागे , तेहा गौटनिन दाई के किरपा ले मिलगे | अब सबे काम , बुता , पढ़ई बेरा में हो जाय | 
    नौवीं कक्षा में रज्जू के अभिभावक के रूप में गौंटनिन दाई के नाम लिखा राहय | एक दिन ओकर स्कूल के प्राचार्य आके गौटनिन दाई के घर मेर रुकके पूछिस ---"रज्जू घर में हे का |" 
     तब गौटनिन दाई के बेटा कीहिस "ओकर घर तो वहा मेर हे आप मन बैठो  मेंहा  अभी बलवा देथों |" अउ लइका मन ला भेजके तुरते बलवा दिस | चाय पानी के पीयत ले रज्जू अंगरी फोरत आगे | दुर्हिया ले अपन स्कूल के प्राचार्य ला चिन्हके प्रणाम सर कहिके गोड़ छूके पॉव परीस तब गुरूजी गॉव के सकेलाय मैनखे मनला बतात कीहिस " हमन एक ठन खुशखबरी देय बर आय हन, हमर विधायक के अनुशंसा ले तुंहर गॉव के ये होनहार बेटी रज्जू के चयन सरकारी खरचा में शहर के बड़का स्कूल में पढ़े बर होगे हे जेमे छात्रवृति तक मिलही |"
   अतका सुनके रज्जू चहकगे अउ ताली पीटत कूदत अपन खुशी व्यक्त कर डरीस | फेर अपन भाई बहिनी के सुरता आते भार बुझाय दिया बरोबर रुऑसू होके कीहिस ----
     "नहीं सर मेंहा कहूंचो पढ़ेला नई जॉव, मोर नान नान भाई बहिनी मनके का होही |"
    तब गौटनिन दाई के बेटा हा तुरते विधायक ला फोन लगा के कीहिस --- "विधायक महोदय रज्जू के नान्हे नान्हे भाई बहिनी के तक कुछू बेवस्था कर देतेव ताकि तीनो झन एके जगा रहिके अपन जिनगी के रद्दा गढ़ सके |"
   विधायक महोदय ला रज्जू के जिनगी के उतार चढ़ाव मालूम रीहिसे तुरते कीहिस ---"मोला सब मालूम हे दाऊजी मेंहा ऊंकरो मन के व्यवस्था कर डरे हंव | तुंहर गॉव के ये होनहार लइका ला तुमन सम्मान पूर्वक शहर भेज देव, बाकी सब व्यवस्था ला मेंहा देख लेहूं |"
   अब बिहान दिन गॉव के सरपंच, पटेल, ग्राम प्रमुख गौटनिन दाई अउ ओकर बेटा के संग मा गॉव भर के मैनखे जुरियाय रज्जू ओकर बहिनी अउ भाई ला पढ़े बर शहर के बड़का स्कूल में अमराके आगे |
     आज बारा बछर होगे.....
शेष भाग 5 पर... 

रज्जू भाग 3

(3)

     परीक्षा उरकगे अउ सगा सोदर मन देय रीहिस तेन धान चाऊंर रुपिया मन तक उरकगे, अब रज्जु ला अपन आगू के जिनगी अउ भाई बहिनी मनके फिकर सताय लागिस | कहॉ ले पैसा आही काली काला खाबो, ये चिंता ओला रात भर सुतन नई दिस | ठंडा सॉस भरत , बाखा बदलत , दयालू चोला के मैनखे खोजत , गौटनिन दाई मेर जाके मन थिरइस अउ नींद परगे |
      पाहती उठ गोबर कचरा करके पानी भर डरिस अउ बेरा उत्ती गौटिया घर जाके गौटनिन दाई ला अरजी करीस ----
    "दाई मेंहा तुंहर घरके गोबर कचरा कर दुहूं पानी कॉजी भर दुहूं मोर अर्जी ला सुने |" 
     गौटनिन दाई ओकर सोगसोगान मुहूं ला देखके रुआंसू होगे अउ कीहिस ---
    "तें नानचुन लइका मेंहा तोला काय काम करा डारहूं बेटी,  ले कियारी में पानी डालदेबे , कोटना मन में आधा आधा कोटना पानी भरके ऊप्पर टंकी में पानी चढ़ा देबे |" 
     कहिके पंप ला चालू कर दिस , आधा घंटा  में काम निपटा के रज्जू गौटनिन दाई मेर खड़े होगे | तब गौटनिन  दाई ओला  खनखनात पान रोटी अथान अउ डेड़ सौ रुपिया  देके किहीस ---
    "बड़ सुंदर कमाय बेटी तें अब रोज  आ जाय कर अउ आज जतका कमाय हस ओतका काम कर देय कर वो तोला मेंहा अतकी पैसा रोज दूहूं |"
सुनके रज्जू खुश होगे अउ गौटनिन दाई के पॉव परके कथे --
   " तिही मोर भगवान अस दाई मेंहा तोर एहसान ला कभू नई भुलॉव |"
    गौटनिन दाई के घर ले अपन घर जावत रज्जू के गोड़ खुशी  के मारे भुइंया में नईं माड़त रीहिस | अब रज्जू  के रोज के इही दिनचर्या रीहिस |
      रज्जू ला आधा घंटा कमई के डेड़ सौ रुपिया देवत देखके दुए चार दिन में घर के अऊ कमाया मन कसकसागे राहय | एक दिन ओकर घर के झाड़ू पोछा करैया कथे---
     "हमरो बनी ला बढ़ादे गौटनिन दाई रज्जू ला आधा घंटा पंप ले पानी भरई के डेड़  सौ  रुपया देथस,  हमन ऐसन  अन्याव  ला नई सहन सकन | 
     तब गौटनिन दाई कीहिस --"तुंहर जवानी  ला धिक्कार हे रे तुमन नानचुन लइका के हिजगा करथो , मेंहा वो लइका के कमई नहीं, वो लइका के अपन परिवार ला चलाय के हिम्मत अउ अपन जिनगी  में कुछू करे के हौसला के कीमत देवथों, देख लेना ये नानचुन लइका अपन जिनगी  में सिर्फ  बनिहार बनके नई राहय, जरूर कुछू करही अऊ कुछ बनके रही , ये मोर आत्मा  काहथे | मेंहा वो लइका बर सबकुछ कुर्बान  कर सकथों ,तुमन कोन होथो बोलने वाला |"  अउ कुछ  देर चुप रहिके थोकिन शंत होके कीहिस --- "सुन बेटी भानू वो लइका  हा टूट गेहे वो , ओकर दाई ददा दोनो नइ हे, ओला सहारा के जरूरत हे , मोर एककनी सहयोग ले ओकर हौसला बाढ़ जही अउ ओकर जीवन में कुछू करेके कुछू बने के हिम्मत जाग जही | रुपिया  पैसा  हा जीवन में सब कुछ नोहे या दूसरा  को जिनगी  ला सहारा देयके प्रयास ला तुमन टोरो झन | महूं अतिक निर्दयी नइ हंव, तहूं मन ला जी खोलके जे मॉगथो देथों फेर तुमन ये नानचुन लइका के हिजगा मत करो, चलो अपन अपन काम में लग जाव |"
   गौटनिन दाई के ऐसन बात ला सुनके घर के सबे कमैया मन अपन अपन काम में लगगे |
    रज्जू हा ऊंकर मन के बीच  के बात ला सुन डरे रीहिसे,  वो जान डरिस कि गौटनिन दाई हा ओला ओकर  मेहनत ले जादा पैसा देवथे | अब रज्जू हा मना करे के बाद भी गौटनिन दाई के घर बखरी के अपन सकऊ सबे काम ला करे लगिस | अवैया मेहमान करा चाय पानी नाश्ता लेगई के काम हा पूरा पूरा रज्जू के होगे | धीरे धीरे गौटनिन दाई के घर के  सबे सदस्य अउ कमैया मन के मन ला जीत डरीस | अपने मॉ के बिछड़े के पीरा ला जिनकी के उतार चढ़ाव जान के सबे काम ला मन से करे लागिस |
शेष भाग 4 पर

रज्जू भाग 2

(2)

अब रज्जु दिन रात एक कर के पढ़ई अउ खेल प्रतिभा निखारे के प्रयास में लगगे, रोज बिहनिया खेल के अभ्यास अउ बाकी बेरा पढ़ई अउ घर काम में अपन मॉ के संग देय |
     एक दिन मोर संगवारी राधे अक्करहा दौंड़त हमर घर अइस,  खैरपा ला भड़ाक ले पेलके परछी में ले दे रुकिस तभो ले पठेरा के भितिया में ओकर मुड़ी लागिच गे | भड़ -भड़, भड़-भड़ भड़ाकले के बजई में हमर घर कोहराम मचगे, सब कोई जतर कतर दौड़त अइन अउ पूछिन का होगे , काये बाजिसे ते हा ,ओ मन  सब सोचत रीहिन "बछवा हा फेर खूंटा ला टोर दिस |" ओतका बेरा मेहा बासी खात रेहेंव,  राधे के ऐसन दौड़त आवई ला देख के महूं हा हड़बड़ा गेंव,  मुहूं के कॉवरा मुहूं में | राधे हफरत हफरत अपने बताइस ---
   "रज्जू घर बड़ मैनखे सकेलाय हे , मोला तो ओकर दाई मरगे तैसे लागथे !"
      तुरते हाथ ला अंचो के जैसे राधे दौंड़त आय रीहिसे तैसने महूं हा सरपट दौंडत रज्जू घर गेंव,  मोर पीछू राधे, ऐसने पूरा गॉव सकेलागे | आठवी के वार्षिक परीक्षा के पहिली ओकर दाई के तबीयत खराब होगे रीहिस, अस्पताल में पॉच छै दिन भर्ती रहे निर्मला रात दिन गोली दवई के बाद भी नई बॉचिस | रज्जु के जीवन में दुख के पहाड़ गिरगे , महतारी के मौत हा रज्जू  ला पथरा बना दिस, अपन पास के एक झन बहिनी अउ छोटे भाई के बोझा अब रज्जू ऊपर आगे , ओमन ला पोटारे रज्जु अपन महतारी ला मरघट्टी  लेगेे के तैयारी  ला देख रीहिस | विधाता द्वारा पटके ये दुख के पहाड़ ला सगा सोदर पारा परोस अउ गॉव भर के मन महसूस करता रीहिसे | जे देखिस, सुनिस तेकरो मुहूं सुखागे, सबे मन एक दूसरा ला काहय अब  का होही ये लइका मन के |
       स्कूल में शोक श्रद्धांजलि के बाद छुट्टी करेगिस, तहॉले हेडमास्टरिन, गुरूजी अउ स्कूल के लइका मन सब के सब रज्जू घर अइन | मुड़ी धरे मुड़सरिया में बैठे एक टक अपन दाई के पींवरा परे मुहूं ला देखत रज्जू हुरहा गुरूजी अउ लइका मन ला देख परिस त पहाड़ कचारे बरोबर बोमफारके रो डरिस, काकरो मन धीर नइ धरिस सब रो डरिन, ये बेरा पूरा घर चिरोबोरो रोवई में गूंजगे | बड़े मेडम हा रज्जू ला ढाढस बंधावत कीहिस -- 
    " तें फिर झन कर बेटी हमन तोर संग हन , अपन आप ला अकेल्ला झन मान हमन सब डाहन ले तोर सहयोग करबो | "
     अउ अपन पर्स ले अब्बड़ अकन रुपिया निकालके रज्जू के हथेली में रख दिस | बड़े मेडम के बात ला सुनके डारा ले गिरे बेंदरी के पीला जैसे अपन माईं ले लिपट जथे तैसने रज्जू हा बड़े मेडम संग लिपटगे, ये बेरा तो मेडम हा तक गोहार पारके  रो डरिस, अबतो एकबेर फेर चिरोबोरो रोवइ में पूरा घर गूंजगे |
       रज्जु के मॉ के तिजनहावन कार्यक्रम के दिन हमर मन के पहिली पेपर हिंदी रीहिस | बड़े मेडम हा रज्जू बर ये पेपर ला बाद में देवाय के बेवस्था कर डरे रीहिसे | दुसरैया पेपर एक दिन के आड़ में रीहिस गुरूजी मन रज्जू ला मना भुरिया के ये पेपर ला देवाय बर तैयार कर डरीस | रज्जू हा अब जीवन के संघर्ष यात्रा बर तैयारी करके परीक्षा देवाय लागिस |
शेष भाग 3 पर...

रज्जू भाग 1


छत्तीसगढ़ी कहानी....... 
                                                "रज्जू"
   मैनखे अपन उमर के अलग अलग पड़ाव में उतार चढ़ाव  भरे जिनकी जीथे | सुख दुख रात दिन बारिश जाड़ घाम सबले गुजरे ला पड़थे | हर प्राणी अपन जीवन  में सुख पाथे त कभू दुख के खाई में तक गिर पड़थे , फेर जे सम्हल के रेंगथे ओकर सबे सपना पूरा होथे | 

    बात वो बेरा के हरे जब मेहा आठवी कक्षा में पढ़त  रेहेंव, मोर संग हमर गॉव के एक झन होनहार नोनी "रज्जू"तक पढ़त रीहिस | कक्षा में सबले हुशियार, अपन सब भाई बहिनी में सबले बड़े, साफ उज्जर कपड़ा पहिने ,तेल लगे गुंथाय दु बेनी,सुंदर काजर पावडर लगाय, रोज बेरा में स्कूल जाय के ओकर दिनचर्या रीहिसे | पारा भर में सबके दुलौरिन सबके बात मनैया | प्रार्थना कराय बर गुरूजी मन हा रज्जु ला बलवाय तब ओकर प्रार्थना करई अउ देशभक्ति के जयकारा करई सबके मन ला भा जाय |
15 अगस्त अउ 26 जनवरी के राष्ट्रीय तिहार के रैली में रज्जू  लाईन में सबले आगू राहय | महात्मा गांधी, सुभाषचन्द्र बोस,पं.जवाहर लाल नेहरू, अउ हमर भारत माता के जयकारा करत  आगू बढ़न तब गॉव भर के मैनखे मन गली के तीर तीर में, चॉवरा में , मुहॉटी में , खड़े हो होके हमर रैली ला सम्मान देय अउ हमर भारत माता के गुनगान ला सुनय |
     हर साल राखी तिहार बर गुरूजी मन हा लइका मन ला लाइन में बैठारके राखी बंधवाय तब रज्जू हा मोला राखी बॉधे, भाई बहिनी के मया छलक अउ झलक जाय | एक दूसरा  ला चवन्नी चाकलेट खवाके मुसकात मया बॉटन | एको दिन में कहूं स्कूल नई जॉव तब रज्जू  हमर  घर  आ जाय अउ पूछे आज  स्कूल काबर  नइ आएस भाई, अउ स्कूल में पढ़ाए सबे विषय के पाठ ला मुंहअंखरा बताके समझा देय |
      रज्जू के बाबू ननपन में गुजर गे रीहिसे, ओकर महतारी निर्मला हा बनी भूती करके पढ़ात रीहिसे | परिवार के हालत अउ अपन भविष्य के प्रति सचेत रज्जु पूरा निष्ठा अउ ईमानदारी  के साथ पढाई के संगे संग घर के काम बुता में अपने मॉ के हाथ बंटाय | 
        स्कूल  के कोनो कार्यक्रम होय रज्जू के भाषण गीत कविता बिना अधूरा लागे,सब गुरूजी अउ लइका मन के चहेती रज्जू पढ़ई सॉस्कृतिक कार्यक्रम के संगे संग खेलकूद में तक पारंगत रीहिसे कबड्डी, रेले-रेस, खो-खो,दौड़ ये सबे खेल में दौड़ में रज्जु हमेशा अव्वल आय | आठवीं कक्षा में केन्द्र स्तरीय खेल प्रतियोगिता में दौड़ में पहला स्थान बनाके स्कूल अउ गॉव के नॉव रोशन करे रीहिसे , संभाग स्तरीय क्रीड़ा प्रतियोगिता में तक दौड़ में पहला आय के बाद प्रॉत स्तरीय खेल प्रतियोगिता बर गुरूजी मन अपने खर्चा में भेजिन, जिहॉ रज्जु फेर पहला आइस तब विधायक द्वारा रज्जु के सम्मान समारोह के आयोजन करे गीस | ये सम्मान समारोह के आयोजन में विधायक हा रज्जु ला पढ़ाय बर गोद लेय के घोषणा करिस अउ एकर खेल प्रतिभा ला निखारे बर प्रशिक्षक के भी व्यवस्था कर दिस |
शेष.... भाग 2 पर