(3)
परीक्षा उरकगे अउ सगा सोदर मन देय रीहिस तेन धान चाऊंर रुपिया मन तक उरकगे, अब रज्जु ला अपन आगू के जिनगी अउ भाई बहिनी मनके फिकर सताय लागिस | कहॉ ले पैसा आही काली काला खाबो, ये चिंता ओला रात भर सुतन नई दिस | ठंडा सॉस भरत , बाखा बदलत , दयालू चोला के मैनखे खोजत , गौटनिन दाई मेर जाके मन थिरइस अउ नींद परगे |
पाहती उठ गोबर कचरा करके पानी भर डरिस अउ बेरा उत्ती गौटिया घर जाके गौटनिन दाई ला अरजी करीस ----
"दाई मेंहा तुंहर घरके गोबर कचरा कर दुहूं पानी कॉजी भर दुहूं मोर अर्जी ला सुने |"
गौटनिन दाई ओकर सोगसोगान मुहूं ला देखके रुआंसू होगे अउ कीहिस ---
"तें नानचुन लइका मेंहा तोला काय काम करा डारहूं बेटी, ले कियारी में पानी डालदेबे , कोटना मन में आधा आधा कोटना पानी भरके ऊप्पर टंकी में पानी चढ़ा देबे |"
कहिके पंप ला चालू कर दिस , आधा घंटा में काम निपटा के रज्जू गौटनिन दाई मेर खड़े होगे | तब गौटनिन दाई ओला खनखनात पान रोटी अथान अउ डेड़ सौ रुपिया देके किहीस ---
"बड़ सुंदर कमाय बेटी तें अब रोज आ जाय कर अउ आज जतका कमाय हस ओतका काम कर देय कर वो तोला मेंहा अतकी पैसा रोज दूहूं |"
सुनके रज्जू खुश होगे अउ गौटनिन दाई के पॉव परके कथे --
" तिही मोर भगवान अस दाई मेंहा तोर एहसान ला कभू नई भुलॉव |"
गौटनिन दाई के घर ले अपन घर जावत रज्जू के गोड़ खुशी के मारे भुइंया में नईं माड़त रीहिस | अब रज्जू के रोज के इही दिनचर्या रीहिस |
रज्जू ला आधा घंटा कमई के डेड़ सौ रुपिया देवत देखके दुए चार दिन में घर के अऊ कमाया मन कसकसागे राहय | एक दिन ओकर घर के झाड़ू पोछा करैया कथे---
"हमरो बनी ला बढ़ादे गौटनिन दाई रज्जू ला आधा घंटा पंप ले पानी भरई के डेड़ सौ रुपया देथस, हमन ऐसन अन्याव ला नई सहन सकन |
तब गौटनिन दाई कीहिस --"तुंहर जवानी ला धिक्कार हे रे तुमन नानचुन लइका के हिजगा करथो , मेंहा वो लइका के कमई नहीं, वो लइका के अपन परिवार ला चलाय के हिम्मत अउ अपन जिनगी में कुछू करे के हौसला के कीमत देवथों, देख लेना ये नानचुन लइका अपन जिनगी में सिर्फ बनिहार बनके नई राहय, जरूर कुछू करही अऊ कुछ बनके रही , ये मोर आत्मा काहथे | मेंहा वो लइका बर सबकुछ कुर्बान कर सकथों ,तुमन कोन होथो बोलने वाला |" अउ कुछ देर चुप रहिके थोकिन शंत होके कीहिस --- "सुन बेटी भानू वो लइका हा टूट गेहे वो , ओकर दाई ददा दोनो नइ हे, ओला सहारा के जरूरत हे , मोर एककनी सहयोग ले ओकर हौसला बाढ़ जही अउ ओकर जीवन में कुछू करेके कुछू बने के हिम्मत जाग जही | रुपिया पैसा हा जीवन में सब कुछ नोहे या दूसरा को जिनगी ला सहारा देयके प्रयास ला तुमन टोरो झन | महूं अतिक निर्दयी नइ हंव, तहूं मन ला जी खोलके जे मॉगथो देथों फेर तुमन ये नानचुन लइका के हिजगा मत करो, चलो अपन अपन काम में लग जाव |"
गौटनिन दाई के ऐसन बात ला सुनके घर के सबे कमैया मन अपन अपन काम में लगगे |
रज्जू हा ऊंकर मन के बीच के बात ला सुन डरे रीहिसे, वो जान डरिस कि गौटनिन दाई हा ओला ओकर मेहनत ले जादा पैसा देवथे | अब रज्जू हा मना करे के बाद भी गौटनिन दाई के घर बखरी के अपन सकऊ सबे काम ला करे लगिस | अवैया मेहमान करा चाय पानी नाश्ता लेगई के काम हा पूरा पूरा रज्जू के होगे | धीरे धीरे गौटनिन दाई के घर के सबे सदस्य अउ कमैया मन के मन ला जीत डरीस | अपने मॉ के बिछड़े के पीरा ला जिनकी के उतार चढ़ाव जान के सबे काम ला मन से करे लागिस |
शेष भाग 4 पर
No comments:
Post a Comment