Sunday, December 14, 2025

ताटंक छंद- अनपढ़ को भी दृढ़ ज्ञानी का

हिन्दी 
ताटंक छंद
मात्रा 16-14- अंत गुरू गुरू गुरू
शीर्षक - ज्ञान कराती हिन्दी

अनपढ़ को भी दृढ़ ज्ञानी का, भान कराती हिन्दी। 
अक्षर-अक्षर शब्द ब्रह‌्म का, ज्ञान कराती है हिन्दी।। 

माँ की गोदी से हम सबकी, प्यारी भाषा हिन्दी है। 
शोभित पुष्पित संस्कारों से, न्यारी भाषा हिन्दी है।। 
गीत रस छंद अलंकार से, मान बदाती है हिन्दी। 
अक्षर-अक्षर शब्द ब्रह्म का, ज्ञान कराती है हिन्दी।। 

भारत माँ का मान बढ़ाये, सुकुमारी भाषा हिन्दी।
संस्कृत की प्यारी बिटिया है, संस्कारी भाषा हिन्दी।। 

राष्ट्र‌गान से जन-जन के मन, शान बढ़ाती है हिन्दी ।
अक्षर-अक्षर शब्द‌ ब्रहम का, ज्ञान कराती है हिन्दी।।

सबकी बोली जाने वाली, भाषा की रानी हिन्दी । 
आओ शपथ उनकर बोलें, हर हिन्दुस्तानी हिन्दी।। 
भारत माता को गौरव का, गान कराती है हिन्दी।
अक्षर-अक्षर शब्द ब्रह्म का ज्ञान कराती है हिन्दी ।।

दीन-हीन अति दलित जनों की, व्यथित जुबानी है हिन्दी।
वीर शहीदों के थाती की, राम कहानी है हिन्दी। 
नित सरहद के वीर शौर्य का, भान कराती है हिन्दी।
अक्षर-अक्षर शब्द ब्रह्म का, ज्ञान कराती है हिन्दी ॥

रचयिता
डॉ.अशोक आकाश
कोहंगाटोला,बालोद, छत्तीसगढ़
491226
मो.नं.9755889199

मनहरण घनाक्षरी- सुख देना हो तो हमें

मनहरण घनाक्षरी

सुख देना हो तो हमें, इतना दे देना प्रभु, 
जीवन में कभी हमें, गर्व का न भाव हो।

और दुख देना हो तो, इतना खयाल रहे, 
प्रभु तेरे चरणों से, पल न दुराव हो।। 

बोलूँ नहीं ऐसे बैन, छीने जो किसी का चैन, 
मुझसे किसी का नैन, बहे मन घाव हो।
 
अशोक आकाश कहे, वही तो विकास गहे, 
जीवन हो कर्मशील, मन सदभाव हो।

अशोक आकाश
7/11/2025

हर्षित आज तिरंगा(सार छंद)

हर्षित आज तिरंगा (सार छंद) 

अनगिन वीरों की बलिदानी, गर्वित उड़े विहंगा। 
लाल किला प्राचीर फहरता, हर्षित आज तिरंगा।। 

बेड़ी टूटी अंग्रेजों की, मिली हमें आजादी। 
भारत मॉं जयकारा गूँजे, पावन हरितिम वादी।। 
सदा शहीदी पदचिन्हों पर, जूझे लड़े पतंगा... 
लाल किला प्राचीर फहरता, हर्षित आज तिरंगा... 

जन गण मन शुचि गान जगाते, राष्ट्र चेतना आँधी। 
घर-घर का हर बच्चा-बच्चा, निकले सुभाष गॉंधी।। 
वंदे मातरम् गान मिटा दे, देश का हर एक दंगा...
लाल किला प्राचीर फहरता, हर्षित आज तिरंगा... 

जाति धर्म के भेद मिटाकर, रहना सीखो भाई। 
अंध-प्रथा अरु ऊँच-नीच की, पाटो गहरी खाई।। 
जब तक खारा सागर खल-बल, कल-कल यमुना गंगा... 
लाल किला प्राचीर फहरता, हर्षित आज तिरंगा... 
अशोक आकाश बालोद
9755889199