हिन्दी
ताटंक छंद
मात्रा 16-14- अंत गुरू गुरू गुरू
शीर्षक - ज्ञान कराती हिन्दी
अनपढ़ को भी दृढ़ ज्ञानी का, भान कराती हिन्दी।
अक्षर-अक्षर शब्द ब्रह्म का, ज्ञान कराती है हिन्दी।।
माँ की गोदी से हम सबकी, प्यारी भाषा हिन्दी है।
शोभित पुष्पित संस्कारों से, न्यारी भाषा हिन्दी है।।
गीत रस छंद अलंकार से, मान बदाती है हिन्दी।
अक्षर-अक्षर शब्द ब्रह्म का, ज्ञान कराती है हिन्दी।।
भारत माँ का मान बढ़ाये, सुकुमारी भाषा हिन्दी।
संस्कृत की प्यारी बिटिया है, संस्कारी भाषा हिन्दी।।
राष्ट्रगान से जन-जन के मन, शान बढ़ाती है हिन्दी ।
अक्षर-अक्षर शब्द ब्रहम का, ज्ञान कराती है हिन्दी।।
सबकी बोली जाने वाली, भाषा की रानी हिन्दी ।
आओ शपथ उनकर बोलें, हर हिन्दुस्तानी हिन्दी।।
भारत माता को गौरव का, गान कराती है हिन्दी।
अक्षर-अक्षर शब्द ब्रह्म का ज्ञान कराती है हिन्दी ।।
दीन-हीन अति दलित जनों की, व्यथित जुबानी है हिन्दी।
वीर शहीदों के थाती की, राम कहानी है हिन्दी।
नित सरहद के वीर शौर्य का, भान कराती है हिन्दी।
अक्षर-अक्षर शब्द ब्रह्म का, ज्ञान कराती है हिन्दी ॥
रचयिता
डॉ.अशोक आकाश
कोहंगाटोला,बालोद, छत्तीसगढ़
491226
मो.नं.9755889199
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