Sunday, December 14, 2025

ताटंक छंद- अनपढ़ को भी दृढ़ ज्ञानी का

हिन्दी 
ताटंक छंद
मात्रा 16-14- अंत गुरू गुरू गुरू
शीर्षक - ज्ञान कराती हिन्दी

अनपढ़ को भी दृढ़ ज्ञानी का, भान कराती हिन्दी। 
अक्षर-अक्षर शब्द ब्रह‌्म का, ज्ञान कराती है हिन्दी।। 

माँ की गोदी से हम सबकी, प्यारी भाषा हिन्दी है। 
शोभित पुष्पित संस्कारों से, न्यारी भाषा हिन्दी है।। 
गीत रस छंद अलंकार से, मान बदाती है हिन्दी। 
अक्षर-अक्षर शब्द ब्रह्म का, ज्ञान कराती है हिन्दी।। 

भारत माँ का मान बढ़ाये, सुकुमारी भाषा हिन्दी।
संस्कृत की प्यारी बिटिया है, संस्कारी भाषा हिन्दी।। 

राष्ट्र‌गान से जन-जन के मन, शान बढ़ाती है हिन्दी ।
अक्षर-अक्षर शब्द‌ ब्रहम का, ज्ञान कराती है हिन्दी।।

सबकी बोली जाने वाली, भाषा की रानी हिन्दी । 
आओ शपथ उनकर बोलें, हर हिन्दुस्तानी हिन्दी।। 
भारत माता को गौरव का, गान कराती है हिन्दी।
अक्षर-अक्षर शब्द ब्रह्म का ज्ञान कराती है हिन्दी ।।

दीन-हीन अति दलित जनों की, व्यथित जुबानी है हिन्दी।
वीर शहीदों के थाती की, राम कहानी है हिन्दी। 
नित सरहद के वीर शौर्य का, भान कराती है हिन्दी।
अक्षर-अक्षर शब्द ब्रह्म का, ज्ञान कराती है हिन्दी ॥

रचयिता
डॉ.अशोक आकाश
कोहंगाटोला,बालोद, छत्तीसगढ़
491226
मो.नं.9755889199

मनहरण घनाक्षरी- सुख देना हो तो हमें

मनहरण घनाक्षरी

सुख देना हो तो हमें, इतना दे देना प्रभु, 
जीवन में कभी हमें, गर्व का न भाव हो।

और दुख देना हो तो, इतना खयाल रहे, 
प्रभु तेरे चरणों से, पल न दुराव हो।। 

बोलूँ नहीं ऐसे बैन, छीने जो किसी का चैन, 
मुझसे किसी का नैन, बहे मन घाव हो।
 
अशोक आकाश कहे, वही तो विकास गहे, 
जीवन हो कर्मशील, मन सदभाव हो।

अशोक आकाश
7/11/2025

हर्षित आज तिरंगा(सार छंद)

हर्षित आज तिरंगा (सार छंद) 

अनगिन वीरों की बलिदानी, गर्वित उड़े विहंगा। 
लाल किला प्राचीर फहरता, हर्षित आज तिरंगा।। 

बेड़ी टूटी अंग्रेजों की, मिली हमें आजादी। 
भारत मॉं जयकारा गूँजे, पावन हरितिम वादी।। 
सदा शहीदी पदचिन्हों पर, जूझे लड़े पतंगा... 
लाल किला प्राचीर फहरता, हर्षित आज तिरंगा... 

जन गण मन शुचि गान जगाते, राष्ट्र चेतना आँधी। 
घर-घर का हर बच्चा-बच्चा, निकले सुभाष गॉंधी।। 
वंदे मातरम् गान मिटा दे, देश का हर एक दंगा...
लाल किला प्राचीर फहरता, हर्षित आज तिरंगा... 

जाति धर्म के भेद मिटाकर, रहना सीखो भाई। 
अंध-प्रथा अरु ऊँच-नीच की, पाटो गहरी खाई।। 
जब तक खारा सागर खल-बल, कल-कल यमुना गंगा... 
लाल किला प्राचीर फहरता, हर्षित आज तिरंगा... 
अशोक आकाश बालोद
9755889199


Sunday, November 30, 2025

देखो कभी न धीरज खोना (चौपाई छंद)

पाओगे ।। 
धीरज कभी न खोना भैया। खेवो निषदिन जीवन नैया।।
समय बुरा है टल जाएगा। नया सवेरा हल लाएगा।।

अशोक आकाश ✍️

तीजा तिहार पर मन हरण घनाक्षरी

*मातु भवानी कृपा कीजिये*

गीत - प्रदीप छंद-16,13 पदांत 212

 *मातु भवानी कृपा कीजिये, दो ऐसा वरदान मॉं।* 
*हो अखंड सौभाग्य हमारा, पुलकित रहे जहान मॉं।।*

        *मातु भवानी कृपा कीजिये...*

*व्रती निर्जला सदा सुहागन, भादो तीज तिहार में।*
*शिव गौरी पूजन करती हैं, सज सोलह शृंगार में॥*
*हम सबका सिन्दूर अमर हो, वर दो कृपानिधान मॉं...*

*हो अखण्ड सौभाग्य हमारा, पुलकित रहे जहान मॉं...* 

*लाली चूड़ी बिंदी चूनर, सिन्दूर लाली से सजूँ।*
*लाली साड़ी लाल महावर, होठों में लाली रचूँ ॥*
*जवाकुसुम सी नित लाली हो, दो जीवन सम्मान मॉं ।*

*हो अखण्ड सौभाग्य हमारा, पुलकित रहे जहान मॉं...* 

*मधुर ध्वनि शुचि वन्दन गाऊँ, मंगल गीत उचारते।*
*घंटा शंख मृदंग बजाऊँ, माता तुम्हें पुकारते।*

*फूल कनेर  मदार चढ़ाऊँ, कर लूँ शिव आह्वान मॉं।*
*हो अखंड सौभाग्य हमारा, पुलकित रहे जहान मॉं॥*

डॉ.अशोक आकाश✍️
दिनॉंक-27-8-2025

मातु भवानी कृपा कीजिये

*मातु भवानी कृपा कीजिये*

गीत - प्रदीप छंद-16,13 पदांत 212

 *मातु भवानी कृपा कीजिये, दो ऐसा वरदान मॉं।* 
*हो अखंड सौभाग्य हमारा, पुलकित रहे जहान मॉं।।*

        *मातु भवानी कृपा कीजिये...*

*व्रती निर्जला सदा सुहागन, भादो तीज तिहार में।*
*शिव गौरी पूजन करती हैं, सज सोलह शृंगार में॥*
*हम सबका सिन्दूर अमर हो, वर दो कृपानिधान मॉं...*

*हो अखण्ड सौभाग्य हमारा, पुलकित रहे जहान मॉं...* 

*लाली चूड़ी बिंदी चूनर, सिन्दूर लाली से सजूँ।*
*लाली साड़ी लाल महावर, होठों में लाली रचूँ ॥*
*जवाकुसुम सी नित लाली हो, दो जीवन सम्मान मॉं ।*

*हो अखण्ड सौभाग्य हमारा, पुलकित रहे जहान मॉं...* 

*मधुर ध्वनि शुचि वन्दन गाऊँ, मंगल गीत उचारते।*
*घंटा शंख मृदंग बजाऊँ, माता तुम्हें पुकारते।*

*फूल कनेर  मदार चढ़ाऊँ, कर लूँ शिव आह्वान मॉं।*
*हो अखंड सौभाग्य हमारा, पुलकित रहे जहान मॉं॥*

डॉ.अशोक आकाश✍️
दिनॉंक-27-8-2025

Friday, November 21, 2025

रज्जू (छत्तीसगढ़ी कहानी)

*रज्जू*
                    छत्तीसगढ़ी कहानी
              
लेखक डॉ.अशोक आकाश

          मैनखे अपन उमर के अलग- अलग पड़ाव में उतार-चढ़ाव भरे जिनगी जीथे। सुख-दुख, दिन-रात, बारिश, जाड़, घाम, भूख-पियास सहत जीवन के रद्दा में सबे जीव ला रेंगे ला पड़थे। दुनिया के सबे परानी जीवन में सुख पाथे त कभू दुख के खाई में तको गिर परथे, फेर जेन सम्हल के रेंगे के कोशिश करथे ओकर सब्बेच सपना जरूर पूरा होथे। 
            बात वो बेरा के हरे जब मेंहा आठवी कक्षा में पढ़त रेहेंव, त मोर संग में रज्जू तको पढ़त रीहिसे। रज्जू हा अब्बड़ सुन्दर गोरी अउ छरहरी देहें के नोनी रीहिसे। कक्षा में सबले हुशियार। अपन सबे भाई बहिनी में सबले बड़े रज्जू के बेरा में स्कूल जाय के  रोज के दिनचर्या रीहिसे। साफ उज्जर कपड़ा, महमहाती तेल चिकचिकात सुन्दर दू ठन बेनी, काजर पावडर लगाय छुकछुकले सुन्दर रज्जू  , पारा भर में सबके बात मनैया सबके दुलौरिन। प्रार्थना मा  मैंहा टूरा लाइन में आगू में खड़े होववँ त रज्जू टूरी लाईन में सबले आगू मा राहय। प्रार्थना करवाय बर गुरूजी मन रज्जू के बोले चाले के तरीका ला अब्बड़ पसंद करे। ओकर प्रार्थना करवई अउ जयकारा बोलवई हा सबके मन ला भा जाय। 
            15अगस्त अउ 26 जनवरी के राष्ट्रीय तिहार मन में रज्जू आगू में तिरंगा झंडा धरे महात्मा गांधी, सुभाषचंद्र बोस, पंडित जवाहरलाल नेहरू अउ भारत माता के जयकारा करत आगू बढ़े तब गॉंव भर के मैनखे मन गली तीर के चॉंवरा अउ मँहाटी मन मा खड़े होके हमर रैली ला सम्मान देवय अउ हमर भारत माता के गुऩगान ला सुनय।
         हर साल राखी तिहार बर गुरूजी मन सबे लइका मनला टाटपट्टी में बैठारके राखी बंधवाय, तब रज्जू हा मोला राखी बांधे, भाई बहिनी के मया दुलार छलक अउ झलक जाय। एक दूसरा ला चवन्नी चाकलेट खवाके मुसकात मया बॉटन, त कभू कभू झगरा तको हो जावन, फेर अबोला कभू नीं रेहेन। एको दिन में कहूं स्कूल नइ जॉंव त रज्जू हमर घर आ जाय, अउ पूछे आज स्कूल काबर नइ आयेस भाई ? अउ स्कूल में पढ़ाय सबे विषय के पाठ ला मुँह अखरा बताके समझा डरे। 
         रज्जू के बाबू ननपन में गुजर गे रीहिसे, ओकर महतारी निर्मला हा बनी-भूती करके परिवार चलात रीहिसे। 
         स्कूल के कोनो कार्यक्रम होय रज्जू के भाषण गीत कविता बिगर अधूरा लागे, समूह नृत्य, एकल नृत्य, नाटक सबमें रज्जू अगुवा राहय। सब गुरूजी अउ लइका मनके चहेती रज्जू पढ़ई साँस्कृतिक कार्यक्रम के संगे संग खेल कूद में तक अगुवा रीहिसे, सबे खेल ला बढ़िया खेले फेर दौड़ में रज्जू अपन स्कूल के केन्द्रस्तरीय खेल प्रतियोगिता में पहिला आय रीहिसे, केन्द्र स्तर के बाद सम्भाग स्तरीय क्रीड़ा प्रतियोगिता में पहिला आयके बाद गुरूजी मन अपन खर्चा में प्रांत स्तरीय प्रतियोगिता बर भेजिन, जिहॉं रज्जू फेर पहिला स्थान बनाके लहुटिस, तब विधायक द्वारा रज्जू के सम्मान में समारोह के आयोजन करेगे रीहिस, ये सम्मान समारोह में विधायक हा रज्जू ला पढ़ाय बर गोद लेयके घोषणा करीस अउ जिहॉं तक पढ़ही तिहॉं तक पढ़ाय के संकल्प लेवत ओकर खेल प्रतिभा निखारे बर प्रशिक्षण के बेवस्था तक कर दीस  । अब रज्जू दिन रात एक करके पढाई अउ खेल प्रतिभा निखारे के प्रयास में लगगे। घर काम में अपन मॉं के हाथ बँटाई ओकर दिनचर्या में शामिल रीहिस। 
         एक दिन मोर संगवारी राधे अक्करहा दऊंड़त हमर घर अइस, खैरपा ला भड़ाक ले पेलके परछी में ले दे के रुकिस तभोले पठेरा के आँट में ओकर मुड़ी लागिचगे। भड़भिड़-भड़भिड़ भड़ाकले बजई में हमर घर कोहराम मचगे, सब कोई जतर कतर ले दऊँड़त अईन। 
सबे मन पूछिन_ "का होगे "? काये बाजिसे तेहा?
     सबे मन इही सोंचत रीहिस "मरखंडा बछवा फेर खूंटा ला टोर दीस"! ओतका बेर मेंहा बासी खावत रेहेंव, राधे के मार हफरत दऊँड़त अवई ला देखके महूँ हड़बड़ागेंव। हॉत के कॉंवरा हाथे में । 
राधे हफर-हफरके अपने बतईस _ "रज्जू घर बड़ मैनखे सकेलाय हवे, मोला तो ओकर दाई मरगे तइसे लागथे।" 
      तुरते हॉत ला अँचोके जैसने राधे दऊँड़त आय रीहिसे वइसने महूँ हा सपरट दऊँड़त रज्जू घर गेंव, मोर पाछू राधे अउ हमर घर के सब कोई दौंड़त अइन, अइसने पूरा गाँव सकेलागे, एकेचकनी में हमर स्कूल के सबे लइका मन आगे। 
          आठवी के वार्षिक परीक्षा के पहिली ओकर दाई निर्मला हुरहा बीमार परगे रीहिसे। अस्पताल में पॉंच छै दिन भरती रहे निर्मला कतको जतन के बाद भी नइ चेतिस। रज्जू के जिनगी में दुख के पहाड़ गिरने। आठवीं परीक्षा शुरू होयके दू दिन पहिली महतारी के मौत हा रज्जू ला पथरा बनादिस।अपन पास के एक झन बहिनी पारो अउ भाई राजू के बोझा अब रज्जू ऊपर आगे। ओमन ला पोटारे रज्जू अपन दाई ला मरघट्टी लेगे के तैयारी ला बोट-बोट देखत रीहिसे। विधाता के पटके ये दुख के पहाड़ ला सगा-सोदर, पारा परोस अउ गॉंव भरके मन महसूस करत रीहिन। जे देखिस सुनिस तेकर मुहूँ सुखागे। सबे मन एक दूसर ले काहय अब का होही येे लइका मनके। 
          स्कूल में प्रार्थना के संग श्रद्धांजलि सभा के बाद छुट्टी करे गीस, तहॉंले हेडमास्टरिन, गुरूजी अउ लइका मन संघरा रज्जू के घर आइन। मुड़ी धरे मुड़सरिया में बइठे, एक टक अपन दाई के पींवरा परे मुहूँ ला देखत रज्जू हुरहा हेडमास्टरिन, गुरूजी अउ संग में पढ़ैया लइका मनला देखिस त पहाड़ कचारे बरोबर बोम फारके रो डरिस, काकरो मन धीरज नइ धरिस, सब रो डरिन। 
     बड़े मेडम हा ढाढस बंधावत कीहिस_"तैं फीकर झनकर बेटी हमन तोर संग हन, अपन आपला अकेल्ला झन मान ,  हमन सब डाहन ले तोर सहयोग करबो।"
            अउ अपन पर्स ले अब्बड़ अकन रुपिया निकाल रज्जू के हाँथ में धरादिस। डारा ले गिरे बेंदरी के पीला जइसे अपन महतारी ले लिपट जथे, वइसने रज्जू हा बड़े मेडम संग लिपटगे, ये बेरा पूरा घर चिरो-बोरो रोवई में गूंजगे। 
           रज्जू के माँ के तिजनहावन कार्यक्रम के दिन हमर मनके पहिली पेपर हिन्दी राहिसे। बड़े मेडम ये पेपर ला बाद में देवायके बेवस्था पहिलिच ले कर दे रीहिसे। दुसरैया पेपर  एक दिन के आड़ में रीहिसे। गुरूजी मन रज्जू ला मना भुरियाके पेपर देवाय बर राजी कर डरिन। रज्जू हा जीवन के संघर्ष- यात्रा बर तैयारी करके परीक्षा देवाय लागिस ।
              
             
               (2) 

           परीक्षा उरकगे अउ सगा सोदर मन देय रीहिस तेन  धान चॉंवुर पैसा सब उरकगे। अब रज्जू ला अपन आगू के जिनगी अउ अपन भाई बहिनी मन के भविष्य के फीकर सताय लागिस, कहॉ ले पैसा आही, काली का खाबो, ये फीकर ओला रात भर सूतन नइ दीस। ठंडा सॉंस भरत, बाखा बदलत, आगू जिनगी के योजना बनात,दयालू चोला के मनखे खोजत, गौंटनिन दाई मेर जाके मन थिराइस अउ नींद परगे।
          पहाती उठ गाय गरू के गोबर कचरा डार, पेरा भूँसा दे के पानी कांजी भर डरिस अउ बेरा उत्ती गौंटिया घर जाके गौंटनिन दाई ला अरजी करीस_"दाई मेंहा तुंहर पानी कांजी भर दुहूं, गोबर कचरा कर दुहूं, मोला काम देदे दाई, मोला काम देदे, मोर अरजी ला सुन ले।"
         गौंटनिन दाई ओकर सोगसोगान मुहूं ला देखके रोवॉंसी होके कीहिस _"तैं नानचुन लइका मैं तोला काय काम करवाहूं बेटी, ले कियॉंरी मन में पानी डार देबे अउ कोटना में आधा कोटना पानी भरके ऊपर टंकी में पानी चढ़ा देबे" कहिके पंप ला चालू करदिस। आधा घंटा में काम निपटाके रज्जू गौंटनिन दाई मेर खड़े होगे तब गौंटनिन दाई हा ओला खनखनात पानरोटी अथान अउ पचास रुपिया देके कीहिस-"बड़ सुंदर कमाय बेटी तें अब रोज आ जायकर अउ आज जतका कमाय हस अतकी बुता रोज करदेबे मेंहा तोला अतकी रुपिया रोज के देहूं।" 
         सुनके रज्जू खुश होगे, अउ गौंटनिन दाई के पॉंव परके कथे_
तैं मोरबर भगवान अस दाई, तोर एहसान ला मेंहा कभू नइ भुलॉंव। "
        गौंटनिन दाई के घर ले अपन घर जावत रज्जू के गोड़ खुशी के मारे भुईयॉं में नइ माड़त रीहिस। अब ओकर रोज बिहनिया के इही दिनचर्या रीहिसे। 
           रज्जू ला आधा घंटा कमई  के अत्तिक पैसा पावत देखके अउ कमैया मन कसकसागे राहय । एक दिन ऊँकर घर के झाड़ू पोंछा करैया कथे_
       "हमरो बनी ला बढ़ादे गौंटनिन दाई रज्जू ला रोज आधा घंटा कमई के पचास रुपिया देथस, हम अइसन अन्याय ला नइ सहि सकन।"
     तब गौंटनिन दाई कीहिस _"तुंहर जवानी ला धिक्कार हे रे, तुमन नानचुन लइका के हिजगा करथो, मेंहा वो लइका के कमई के नहीं, ओकर अपन परिवार ला चलायके हिम्मत अउ अपन जिनगी में कुछू करे के हौसला के कीम्मत देथँव। देख लेना ये नानचुन लईका अपन जिनगी में सिर्फ बनिहार बनके नइ राहय, जरूर कुछू करही अउ कुछू बनके रही, ये मोर आत्मा काहथे। मैंहा वो लइका बर सब कुछ कुर्बान कर सकथँव, तुमन कोन होथो बोलने वाला।" 
        फेर गौंटनिन दाई थोकिन चुप रहिके शांत होके कीहिस_" देख बेटी भानू वो लइका टूट गेहे वो, ओकर दाई ददा दुनो नइहे, ओला सहारा के जरूरत हे। रुपिया पैसा हा जिनगी बर सब कुछ नोहे, दूसरा के जिनगी ला सहारा देबर कुछू करेके प्रयास ला तुमन टोरव झन। महूं अतिक निरदइ नइ हँव, तहूँ मनला जी खोलके देथँव, फेर तुमन ये नानचुन लइका के हिजगा झन करो, चलो अपन काम में लग जाव।"
        गौंटनिन दाई के बात ला सुनके सबे कमैया मन मानगे अउ अपन-अपन काम-बुता मा लगगे। रज्जू हा ऊँकर मन के बीच के गोठ-बात ला सुनत रीहिसे, वो जानगे कि गौंटनिन दाई हा ओला ओकर मेहनत ले जादा पैसा देवथे। अब रज्जू हा गौंटनिन दाई के घर, कोठा,बाड़ी बखरी के छोटे छोटे काम बुता करे लागिस। घर में आये सगा-सोदर मन करा चाय पानी लेगई के बुता रज्जू को पोगरी होगे। थोरिक दिन में घर के सबे सदस्य अउ कमैया मन के मन ला जीत डरीस, हमेशा गुमशुम रहैया रज्जू अपन मॉं ले बिछड़े के पीरा ला भुलाके जीवन के उतार चढ़ाव मा सम्हलके रेंगे लागिस। 
          परीक्षा के रिजल्ट आगे यहू साल रज्जू अपन स्कूल में अव्वल आइस। अइसन बिपत के बेरा में धीरज बनाके रखे के सेती स्कूल के सबे मास्टर मास्टरिन मन ओकर बड़ बड़ाई करीन। 
           हाईस्कूल हा गॉंव ले छै किलोमीटर दुर्हिया रीहिसे, संगवारी मन संग जाके रज्जू हाई स्कूल में भरती होगे। अब रज्जू रोज बिहनिया ले संझा तक घर ,स्कूल अउ गौंटनिन दाई के घर के बुता में बेंझवाय लागिस, ओला एकोकनी पढ़े के बेरा नइ मिलत रीहिसे, हप्ता, पंदरही में रज्जू करियागे। गौंटनिन दाई रज्जू के मन के पीरा ला जान डरीस। एक दिन कीहिस_"जब ले मोर नोनी शिखा के बिहाव होय हे बेटी, ये साइकिल हा माड़ेच हवे, जा बेटी ये साइकिल ला लेजा, तोर बेरा मों स्कूल जायके काम आही। मन लगाके पढ़ अउ जिनगी के सुग्घर रद्दा गढ़।"
          नवा टायर,तारा, घंटी, फुंदरा लगे चुक-चुकले, नवॉं दुलहिन बरोबर सजे साइकिल ला  देखके रज्जू खुश होगे, फेर थोरिक उदास होके कीहिस -"एकर कोनो जरूरत नई रीहिस दाई, मेंतो दौंड़त चल देथों, फेर बता के पैसा दुहूं। "
         तब गौंटनिन दाई कीहिस "मैं कोनो बैपार करथँव वो, जेमे तोला पैसा में दुहूं" अउ रज्जू ला छाती में ओधाके कीहिस, _"माड़े माड़े सबे खराब होगे रीहिस बेटी, तोरेच बर एला बनवाय हँव, लेजा एमा स्कूल जाबे त मोरो मन माड़ही। "
         तब रज्जू हा ओला पोटारके कीहिस_"मेंहा तोर कब काम आहँ दाई, तोर ये सबे करजा ला कब छुटहूं वो। "
      रज्जू बर ये साइकिल हा कोनो सूरज चंदा ले कम नइ रीहिस, जेकर सपना देखई तक पहाड़ रीहिसे, वहू हा गौंटनिन दाई के किरपा ले पूरा होगे। अब सबे काम बेरा में हो जाय । नौंवी कक्षा में अभिभावक के रूप में गौंटनिन दाई के नाम लिखवाय रीहिसे। एक दिन ओकर स्कूल के प्राचार्य हा  गौंटनिन घर मेर रुकके पूछिस_"रज्जू घर में हवे का।" गौंटनिन दाई ओतिक बेरा घर में नइ रीहिस, ओकर बेटा आरो ला सुनके बाहिर आवत कीहिस
-"ओकर घर थोरिक दुरिहा में हवे, मैंहा बुलवा देथों, आप मन बैठो।" अउ लइका मनला भेजके रज्जू ला तुरते  बलवादेथे। चाय पानी के पीयत ले रज्जू अंगरी फोरत आगे अउ कीहिस
-"का बात आय भैया मोला कइसे बलवाय हव। "
     अउ अपन स्कूल के प्राचार्य ला चिन्ह के प्रणाम सर कहिके पॉव परीस, ओतकी बेरा गौंटनिन दाई तक पहुंचगे, अउ कीहिस
_ तोर स्कूल के गुरूजी मन आय हे बेटी चल चाय पानी पिया। "
     गुरूजी कीहिस _"हमन पी डरे हन, एक ठन खुशखबरी देय बर आय हन, हमर विधायक महोदय के अनुशंसा ले, तुंहर गॉव के होनहार बेटी रज्जू के चयन शहर के बड़का स्कूल में सरकारी खर्चा में पढ़े बर होगे हवे, जेमा छात्रवृत्ति तक मिलही।"
         अतका सुनके रज्जू चहकगे अउ ताली पीटत कूदत अपन खुशी व्यक्त कर डरीस, फेर अपन बहिनी भाई के सुरता आते भार बुझाय दीया बरोबर रुआँसू होके कीहिस_
         "नहीं सर में कहुंचों पढ़े ला नइ जॉव, मोर नान नान भाई अउ बहिनी मनके का होही।"
    तब गौंटनिन दाई के बेटा विधायक करा तुरते फोन लगाइस अउ कीहिस_ विधायक महोदय रज्जू के नान्हे नान्हे भाई बहिनी मनके घलो कोनो बेवस्था करदेतेव ताकि तीनो झन एके जघा रहिके पढ़ सके। "
         विधायक महोदय हा रज्जू के जिनगी के उतार-चढ़ाव ला जानत रीहिसे, वो तुरते कीहिस_"मोला सब मालूम हे दाऊजी, मेंहा ऊँकरो मनके व्यवस्था कर डरे हँव। तुंहर गॉव के ये होनहार लइका मनला तुमन सम्मानपूर्वक शहर भेज देव, बाकी सबे बेवस्था ला में देख लुहूँ।" 
        बिहान दिन गॉंव के सरपंच पटैल, ग्राम प्रमुख, गौंटनिन दाई अउ ओकर बेटा संग गॉंव भरके मैनखे जुरियाय, रज्जू ओकर भाई अउ बहिनी ला, बड़का शहरके बड़ेजन स्कूल में अमराके आगे। 

                    3
               
          आज बारा बछर होगे.....

      बड़े बिहनिया कोतवाल हा हॉंका पारिस_ "आज हमर गॉंव में सब काम धाम बंद हे, बारा बजे पंचायत चौंक मेर सकेलात जाहू हो.......!"
 सब कोई पूछे_" का होगे कोतवाल ? का बात बर गॉंव बंद हे ? "
कोतवाल कीहिस_"में नइ जानों ददा, ऊप्पर ले शासन के आदेश आय हे।"
गॉव के मन पटैल कर गीस, सरपंच करा गीस, कोनो ला कुछू नइ मालूम, अतका भर पता चलिस कि हमर गॉंव में बड़े जन साहब अवैया हे। सब गॉंव भरके मन अगोरा करत राहय, सबे मन सोंचत राहय कोन साहेब होही? 
            बेरा उत्ती बड़े बड़े मशीन गॉंव के कच्ची सड़क ला डामरीकरण करे बर आगे। 10के बजत ले गॉंव के कच्ची सड़क डामर के होगे । पूरा गॉंव डामरे डामर महमहावथे। पंचायत के आघू के बिगड़हा बोरिंग बनगे। गौरा चॉंवरा कराके बोरिंग में पंप फिट करके बीच गली के आवत ले चार पॉंच जघा नल लगगे। वृक्षारोपण करे बर पौधा पटकागे, अब्बड़ अकन गड्ढा खनागे। पंचायत के आघू मा मंच तैयार होगे, पंडाल तनागे, अब्बड़ अकन कुर्सी सजगे, माइक बाजे लागिस, देशभक्ति के गीत गूंजगे_"मेरे देश के धरती सोना उगले, उगले हीरा मोती, मेरे देश के धरती.....। "
      ग्यारा बजे अब्बड़ अकन कार आके पंचायत के आगू में रुकिस, पूरा गॉंव सकेलागे, हमर गॉंव में बड़ेज्जन साहब आगे। सरपंच, पटैल, पंच अउ गॉंव वाले मन जाके फूल माला में कार ले उतरते भार साहब मनके अगुवानी करीन। चमचमाती कार उतरैया मन तक शूट बूट में, पूरा गॉंव भरके सकेलाय मनखे मन खुसुर-फुसुर करथे, फेर फूल माला देवैया मनला वो साहब मन कहिदिन_
"अरे हमन नोहन भैया, बड़े साहब बाद में आही, हमन बेवस्था देखे हर आय हन। "
      अब पूरा गॉंव के सबे बेवस्था के निगरानी करे गीस - बिजली, पानी, सड़क, साफ सफाई  सब चकाचक.....! 
       पूरा गॉंव के मन ये साहब अउ सबे विभाग के कर्मचारी मनके चाय पानी के बेवस्था में लगगे। सवा ग्यारा बजे एक ठन अउ कार अइस, गॉंव भरके मन अउ पहिली आय रीहिस ते साहब मन उत्ता-धुर्रा वो कार डाहर दौंड़िन, गिरत हपटत वो साहब के तीर में जावत ले कार में बैठे साहब हा कार के रुके के पहिलिच ले कार के दरवाजा खोलके उतरत गिर परीस, अउ पहिली ले आय साहब मनला खिसियाके कीहिस_
       "पागल हो तुमन ईहॉं चाहा पीये ला आय हव, मोला नौकरी ले निकलवा दुहू का, गॉंव के बाहिर में स्वागत गेट कोन बनवाही। "
   अब सब कोई ला सुरता अईस, टेंट वाले ला कहिके जल्दी-जल्दी सुन्दर गेट बनवाय गिस, अउ पेंटर ला कहिके, सफेद कपड़ा के बेनर में स्वागत हे कहिके लिखवाय गिस। गॉव के स्कूल के हेडमास्टर ला कहिके तुरते लइका मनके सांस्कृतिक कार्यक्रम तैयार करवाय गिस। 
         अब तो पूरा गॉंव आश्चर्य में परगे हमर गॉंव में अइसन कोन साहब अवैया हे, जेकर बर हमर गॉंव के अत्तिक साज सिंगार होवथे। 
        ठीक बारा बजे मेन रोड ले गॉंव के धरसा में नवॉं बने सड़क डाहन आठ नौ ठन गाड़ी के काफिला मुड़िस, वॉंऊँ-वॉंऊँ, वॉंऊँ-वॉंऊँ गाड़ी के शायरन दुर्हिया ले गूंजगे। गाड़ी में बैठे मोर मन अपन बचपना के फोटो  खींचत रीहिस। जीवन के संघर्ष यात्रा में तपके निखरे रज्जू हमर जिला के कलेक्टर बनगेहे। 
          ***
           
लेखक_ डॉ.अशोक आकाश
ग्राम -कोहंगाटोला पो.ज.सॉंकरा, 
तहसील जिला बालोद, छत्तीसगढ़
मोबाईल नंबर_ 9755889199

मनहरण घनाक्षरी - बाई के सम्मान करो



मनहरण घनाक्षरी
बाई के सम्मान करो, नित गुणगान करो, संग पार करो नैय्या, जिनगी निखारके।
लइका सियान ध्यान, करथे ये गुणवान, सुते नींद उठ जथे, देखो तो पुकारके।। 
मुड़ी में ले सबे भार, करे परिवार पार, बियारी तिहार बार, चिंता खेत खार के। 
देखो पल छिन-छिन, दिन बीते गिन-गिन, बाई बिना चार दिन, जिनगी गुजारके।। 
अशोक आकाश 8/11/2025

Thursday, November 20, 2025

महा गणेश आरती (पंचचामर छंद)

महागणेश आरती (पंचचामर छंद)

सुवेदिका सुगंधिता निवेदिता पुकारती।
सुपंच चाम्रछंद त्वं महागणेश आरती।।

गणाधिराज त्वं नमं नमामि पार्वती सुतं।
शिवं प्रभातके नमं नमामि त्वं विनायकं।।
दिवाकरं द्विभास्करं  विनायके सुधावरं।
सुसंसकार वार दे पुरंदरा गदाधरं।।

हरीतिमा वसुंधरा स्वतंत्र धार भारती।
सुपंच चाम्रछंद त्वं महागणेश आरती।। १।।

प्रियंवदा तरंगिणी अनंग जीत द्वंद से।
सशक्त धारणा मिली सुपंच चाम्रछंद से।।
सुधन्यताश्व शीघ्र ही प्रपंच नाश हो सदा।
शिवात्म रूप सार त्वं सुधार धार सर्वदा।।

त्व मातृ जन्मदात्रि अग्निहोम दुःख निवारती।
सुपंच चाम्रछंद त्वं महागणेश आरती।। २।।

डॉ.अशोक आकाश
ग्रम  कोहंगाटोला, 

बालोद छत्तीसगढ़
9755889199

Tuesday, November 18, 2025

गीतिका छंद - शारदे मॉं

       *गीतिका छंद में - मॉं शारदे वन्दना*
शारदे मॉं ! शारदे मॉं !  नित नवल उद्गार दे। 
धार दे मेरे कलम में, सुर में शृंगार दे।।
शारदे मॉं ! शारदे मॉं ! नित नवल उद्गार दे... 
आग है मेरे हृदय में, कुछ नवल सुविचार लूँ। 
पास आकर अब तुम्हारे, चरण के रज सार लूँ।। 
कल्पना आँधी चली है, सफलता साकार दे। 
शारदे मॉं ! शारदे मॉं ! नित नवल उद्गार दे।। 1।। 
आज तेरे शुचि चरण में, भेंट अर्पण क्या करूँ। 
दो मुझे शुभकामनाएँ, निज समर्पण क्या करूँ।। 
भावना की जोत जलकर, तम हृदय अंगार दे। 
शारदे मॉं ! शारदे मॉं ! नित नवल उद्गार दे।। 2 ।। 
क्लान्त हूँ मॉं सो गई मम, दग्ध मन की भावना। 
प्रेम निर्मल उर बसे मॉं, है यही बस कामना।। 
जागते अवरुद्ध स्वर में, लय सुरों की धार दे। 
शारदे मॉं ! शारदे मॉं ! नित नवल उद्गार दे।। 3 ।। 
वन्दना कैसे करूँ मैं, स्वर नहीं तो क्या करूँ। 
बैठ उपवन कोकिलाएँ, गान करतीं सुर भरूँ।। 
मातु मेरे सौम्य उर में, शब्द का झंकार दे। 
शारदे मॉं ! शारदे मॉं! नित नवल उद्गार दे।। 4 ।।
आज ऊषाकाल मंगल, गान करने आ रहे।
सूर्य भी संसार जीवन, दान करने आ रहे।।
कनक घट में ज्योति मञ्जुल, तेल की शुचि धार दे। 
शारदे मॉं! शारदे मॉं! नित नवल उद्गार दे।। 
               000
डॉ.अशोक आकाश
ग्राम कोहंगाटोला बालोद 
छत्तीसगढ़
मो.नं.9755889199
सृजन दिनॉंक
23 अक्टूबर 2025



हर सपने साकार हो

प्रदीप छंद - क्या होगा परिणाम रे... 
मात्रा भार 16-13
पदांत  212
सृजन शीर्षक- होगा क्या परिणाम रे

कर्म से ही कटे अंधेरा, धीरज रख मन थाम रे। 
कर्म नहीं कर पाओगे तो, होगा क्या परिणाम रे।। 

प्यारे समय रेत मुट्ठी का, फिसल न जाये गॉंठ से। 
कहॉं मिलेगा फिर दोबारा, गठिया लो जी ठाठ से।। 
एक -एक पग चलते जाओ, मिलके रहना धाम रे... 

कर्म नहीं कर पाओगे तो, होगा क्या परिणाम रे... 

जितनी मीठी चाय बनाओ, उतना शक्कर डालना। 
ऊँचा दरवाजा पहले कर, तब फिर हाथी पालना।। 
जितनी ऊँची ख्वाहिश होगी, उतना लगता दाम रे... 

कर्म नहीं कर पाओगे तो, होगा क्या परिणाम रे... 

जितना श्रम करते जाओगे, मिलती मंजिल जान लो। 
कठिन साधना काटे घेरा, गुरूमंत्र यह मान लो।। 
सद्कर्मों पर लगन लगाओ, मिल जायेगा नाम रे... 

कर्म नहीं कर पाओगे तो, होगा क्या परिणाम रे... 

अशोक आकाश 🌠☁⛅

होगा क्या परिणाम रे

प्रदीप छंद - क्या होगा परिणाम रे... 
मात्रा भार 16-13
पदांत  212
सृजन शीर्षक- होगा क्या परिणाम रे

कर्म से ही कटे अंधेरा, धीरज रख मन थाम रे। 
कर्म नहीं कर पाओगे तो, होगा क्या परिणाम रे।। 

प्यारे समय रेत मुट्ठी का, फिसल न जाये गॉंठ से। 
कहॉं मिलेगा फिर दोबारा, गठिया लो जी ठाठ से।। 
एक -एक पग चलते जाओ, मिलके रहना धाम रे... 

कर्म नहीं कर पाओगे तो, होगा क्या परिणाम रे... 

जितनी मीठी चाय बनाओ, उतना शक्कर डालना। 
ऊँचा दरवाजा पहले कर, तब फिर हाथी पालना।। 
जितनी ऊँची ख्वाहिश होगी, उतना लगता दाम रे... 

कर्म नहीं कर पाओगे तो, होगा क्या परिणाम रे... 

जितना श्रम करते जाओगे, मिलती मंजिल जान लो। 
कठिन साधना काटे घेरा, गुरूमंत्र यह मान लो।। 
सद्कर्मों पर लगन लगाओ, मिल जायेगा नाम रे... 

कर्म नहीं कर पाओगे तो, होगा क्या परिणाम रे... 

अशोक आकाश 🌠☁⛅

Saturday, November 15, 2025

मातृ-पितृ स्तवनदोहा- मात पिता की वन्दना, चरण झुका कर शीश। मेरे मस्तक हाथ रख, देना नित आशीष।। चौपाई - जय जय मात पिता मम देवा। जन्मदात्री करूँ नित सेवा।। मात पिता मम पूज्य सितारे। तुमको दूँ जीवन सुख सारे।। तुमसे तन धन जीवन पाया। ऋण तेरा कब कौन चुकाया।। जब जीवन अंधियारी छाये। मात पिता तब दीप जलाये।। तुमने पग-पग साथ निभाया। जब दुख आये दूर भगाया।। मॉं गंगा है स्नेही निर्मल। पिता धर्म सम दीपक उज्ज्वल।। मॉं आँचल की शीतल छाया। पिता की वाणी से बल पाया।। मॉं कोमल ममता रस घोले। सुदृढ़ पिता जीवन पथ खोले।। दोहा - करूँ नमन उन चरण को, जिनमें दिव्य प्रकाश। मात मिता अनुरागमयी, उनके मिटे निराश।। चौपाई - माता पिता कृपालू दाता। जीवन के तुम प्रथम विधाता।। जब मैं गिरा धरा पर रोया। तुमने झटपट हृदय समोया।। भरी नींद पलकों पे आई। तुम झूला बन गीत सुनाई।। भूख लगी तब अन्न खिलाया। नींद लगी गोदी में सुलाया।। कभी थके नहीं रुके न हारे। देते सुख नित दिये सहारे।। जनम -जनम वर मांगूँ ऐसा। साया मिले तुम्हारे जैसा।। दोहा - यही जगत के प्रथम गुरू, काटे जीवन क्लेश। बच्चों के जीवन सदा, माता पिता विशेष।। चौपाई - मॉं ममता की मूरत ठहरी। पिता सदा रहता मम प्रहरी।। मॉं की नैन करुण रस धारा। पितृ बैन सुन दुर्मति हारा।। बैरी रात जगे जब माता। पिता झपट सब त्रास मिटाता।। पिता वैद्य है पिता दवाई। मातु मिटाती फटी बिवाई।। तुमसे पाया सभी खजाना। सेवा प्रेम समर्पण बाना।। जब संतति पर संकट आया। तुमने शाश्वत धर्म निभाया।। मॉं धरती का फर्ज निभाये। पिता स्वप्न साकार बनाये।। मात पिता नित वन्दन करते। वही सदा सुख जीवन भरते।। दोहा - है देवों के देव पिता, मॉं धरती का रूप। इनका नित पूजन करो, बनते काज अनूप।। चौपाई - ज्ञान ज्योति का करे उजाला। देव सदृश ये भरे निवाला।। मात पिता का मान करोगे। तब जीवन रस पान करोगे।। इनसे रख लो निर्मल नाता। सबका जीवन सहज बनाता।। मर्यादा का पाठ पढ़ाते। संतति शुचि संस्कार जगाते।। प्रथम प्रणाम करे पितु माता। गणपति प्रथम देव विख्याता।। श्रवण कुमार सुयश युग बेटा। राम श्रेष्ठ सुत कलयुग त्रेता।। युग-युग इसका यश नित गाये। मात-पिता ऋण चुका न पाये।।इनसे खुले स्वर्ग का ताला। माता सखी पिता रखवाला।। दोहा - पिता रुद्र पीता गरल, विष्णु बह्म का वास। माता धरती सम सरल, पिता सुदृढ़ आकाश।। ०००डॉ.अशोक आकाश ग्राम कोहंगाटोला, बालोद, छत्तीसगढ़9755889199

मातृ-पितृ स्तवन - रचयिता डॉ.अशोक आकाश

Thursday, November 6, 2025

जड़ मन दिखे नहीं, तभो ले एकर मान, स्वरगान करे फूल, खुशबू बिखेर के। कुँवर-कुँवर पाना, लहरा-लहरा नाचे, हवा अठखेली करे, मया ला उकेर के। धरती ले पोषण के, रस पौधा मन ला दे, पोषित करत देखे, आँखी ला नटेर के। अशोक आकाश कथे, बाप जड़ अस होथे, परिवार खुशी देथे, खुदे ला निचोड़के। अशोक आकाश 6 नवंबर 2025 दिन गुरूवार

[06/11, 7:32 pm] ashokakash1967@gmail.com: मोर कोहंगाटोला गॉंवभारत माता के कोरा में, मोर कोहंगाटोला गॉंव।जूझारा नंदिया हा पखारे, एकर उज्जर पॉंव।। . जिला बलौद के नामी गॉंव में, हमन जनमेन भैया। इहॉं के सुम्मत टोर नीं सके, थकगे नजर लगैया।। बर पीपर रुख राई मन के, हावे सुग्घर छॉंव।जूझारा नंदिया हा पखारे, एकर उज्जर पॉंव।। खेत खार मन सोना उगले, गीत सुमत के गायेन। छत्तीसगढ़ ला धान कटोरा, हमन मिल के बनायेन।। इहॉं के लइका मन बगरावै, डिही डोंगर के नॉंव। जुझारा नंदिया हा पखारे, एकर उज्जर पॉंव।।शीतला मैया के पैंया में, परे हवन हम सब झन। देवत हे आशीष सबे ला, खुशी मनाथे जन जन।। थीरथार जिनगी के नैया,करन नहीं रॉंव-रॉंव। जूझारा नंदिया हा पखारे, एकर उज्जर पॉंव।।लामी-लामा बसे गॉंव में, बर पीपर के छॉंव। जूझारा नंदिया हा पखारे, एकर उज्जर पॉंव।।अशोक आकाश[06/11, 8:40 pm] ashokakash1967@gmail.com: जीवन कागज कोरा, ज्यों धरती मैंया कोरा, मॉं बाप भरथे ओमा, रंग ला चिभोर के। कोरा काग़ज़ में हम, जैसन भी लिख लेबो, मन के जज्बात चाहे, वेद ऋचा लोर दे।कुरान आयत छवि, लिख सुंदर भाव कवि, दमक-दमक रवि, रंग स्याही घोर के।अशोक आकाश कहे, जैसे रंग भाव रहे,पुत्र पितु शैली बहे, राह में अगोर के। अशोक आकाश6/11/2025[06/11, 9:10 pm] ashokakash1967@gmail.com: जीवन तो ईश्वर का, दिया हुआ उपहार,जन उपकार कर, रंग चोखा घोलिये।मन का विकार त्याग, रख पवि सुविचार, भावना की कूचियों से, प्रेम गान बोलिये। मन को प्रसन्न रख, घर मान अन्न रख,सेवा उपकार भाव, साध सादा होलिये।अशोक आकाश कहे, सदा सदभाव रहे, शत्रु से भी मित्रता होबैर गॉंठ खोलिये।6/11/2025[06/11, 9:25 pm] ashokakash1967@gmail.com: सुख देना हो तो हमें, इतना दे देना प्रभु, जीवन में कभी हमें, गर्व का न भाव हो।और दुख देना हो तो, इतना खयाल रहे, प्रभु तेरे चरणों से, पल न दुराव हो।। बोलूँ नहीं ऐसे बैन, छीने जो किसी का चैन, मुझसे किसी का नैन, बहे मन घाव हो। अशोक आकाश कहे, वही तो विकास गहे, जीवन हो कर्मशील, मन सदभाव हो।अशोक आकाश6/11/2025