Thursday, November 6, 2025
[06/11, 7:32 pm] ashokakash1967@gmail.com: मोर कोहंगाटोला गॉंवभारत माता के कोरा में, मोर कोहंगाटोला गॉंव।जूझारा नंदिया हा पखारे, एकर उज्जर पॉंव।। . जिला बलौद के नामी गॉंव में, हमन जनमेन भैया। इहॉं के सुम्मत टोर नीं सके, थकगे नजर लगैया।। बर पीपर रुख राई मन के, हावे सुग्घर छॉंव।जूझारा नंदिया हा पखारे, एकर उज्जर पॉंव।। खेत खार मन सोना उगले, गीत सुमत के गायेन। छत्तीसगढ़ ला धान कटोरा, हमन मिल के बनायेन।। इहॉं के लइका मन बगरावै, डिही डोंगर के नॉंव। जुझारा नंदिया हा पखारे, एकर उज्जर पॉंव।।शीतला मैया के पैंया में, परे हवन हम सब झन। देवत हे आशीष सबे ला, खुशी मनाथे जन जन।। थीरथार जिनगी के नैया,करन नहीं रॉंव-रॉंव। जूझारा नंदिया हा पखारे, एकर उज्जर पॉंव।।लामी-लामा बसे गॉंव में, बर पीपर के छॉंव। जूझारा नंदिया हा पखारे, एकर उज्जर पॉंव।।अशोक आकाश[06/11, 8:40 pm] ashokakash1967@gmail.com: जीवन कागज कोरा, ज्यों धरती मैंया कोरा, मॉं बाप भरथे ओमा, रंग ला चिभोर के। कोरा काग़ज़ में हम, जैसन भी लिख लेबो, मन के जज्बात चाहे, वेद ऋचा लोर दे।कुरान आयत छवि, लिख सुंदर भाव कवि, दमक-दमक रवि, रंग स्याही घोर के।अशोक आकाश कहे, जैसे रंग भाव रहे,पुत्र पितु शैली बहे, राह में अगोर के। अशोक आकाश6/11/2025[06/11, 9:10 pm] ashokakash1967@gmail.com: जीवन तो ईश्वर का, दिया हुआ उपहार,जन उपकार कर, रंग चोखा घोलिये।मन का विकार त्याग, रख पवि सुविचार, भावना की कूचियों से, प्रेम गान बोलिये। मन को प्रसन्न रख, घर मान अन्न रख,सेवा उपकार भाव, साध सादा होलिये।अशोक आकाश कहे, सदा सदभाव रहे, शत्रु से भी मित्रता होबैर गॉंठ खोलिये।6/11/2025[06/11, 9:25 pm] ashokakash1967@gmail.com: सुख देना हो तो हमें, इतना दे देना प्रभु, जीवन में कभी हमें, गर्व का न भाव हो।और दुख देना हो तो, इतना खयाल रहे, प्रभु तेरे चरणों से, पल न दुराव हो।। बोलूँ नहीं ऐसे बैन, छीने जो किसी का चैन, मुझसे किसी का नैन, बहे मन घाव हो। अशोक आकाश कहे, वही तो विकास गहे, जीवन हो कर्मशील, मन सदभाव हो।अशोक आकाश6/11/2025
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