जड़ मन दिखे नहीं, तभो ले एकर मान, स्वरगान करे फूल, खुशबू बिखेर के। कुँवर-कुँवर पाना, लहरा-लहरा नाचे, हवा अठखेली करे, मया ला उकेर के। धरती ले पोषण के, रस पौधा मन ला दे, पोषित करत देखे, आँखी ला नटेर के। अशोक आकाश कथे, बाप जड़ अस होथे, परिवार खुशी देथे, खुदे ला निचोड़के। अशोक आकाश 6 नवंबर 2025 दिन गुरूवार
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