मनहरण घनाक्षरी
बाई के सम्मान करो, नित गुणगान करो, संग पार करो नैय्या, जिनगी निखारके।
लइका सियान ध्यान, करथे ये गुणवान, सुते नींद उठ जथे, देखो तो पुकारके।।
मुड़ी में ले सबे भार, करे परिवार पार, बियारी तिहार बार, चिंता खेत खार के।
देखो पल छिन-छिन, दिन बीते गिन-गिन, बाई बिना चार दिन, जिनगी गुजारके।।
अशोक आकाश 8/11/2025
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