Tuesday, November 18, 2025

हर सपने साकार हो

प्रदीप छंद - क्या होगा परिणाम रे... 
मात्रा भार 16-13
पदांत  212
सृजन शीर्षक- होगा क्या परिणाम रे

कर्म से ही कटे अंधेरा, धीरज रख मन थाम रे। 
कर्म नहीं कर पाओगे तो, होगा क्या परिणाम रे।। 

प्यारे समय रेत मुट्ठी का, फिसल न जाये गॉंठ से। 
कहॉं मिलेगा फिर दोबारा, गठिया लो जी ठाठ से।। 
एक -एक पग चलते जाओ, मिलके रहना धाम रे... 

कर्म नहीं कर पाओगे तो, होगा क्या परिणाम रे... 

जितनी मीठी चाय बनाओ, उतना शक्कर डालना। 
ऊँचा दरवाजा पहले कर, तब फिर हाथी पालना।। 
जितनी ऊँची ख्वाहिश होगी, उतना लगता दाम रे... 

कर्म नहीं कर पाओगे तो, होगा क्या परिणाम रे... 

जितना श्रम करते जाओगे, मिलती मंजिल जान लो। 
कठिन साधना काटे घेरा, गुरूमंत्र यह मान लो।। 
सद्कर्मों पर लगन लगाओ, मिल जायेगा नाम रे... 

कर्म नहीं कर पाओगे तो, होगा क्या परिणाम रे... 

अशोक आकाश 🌠☁⛅

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