Tuesday, November 18, 2025

गीतिका छंद - शारदे मॉं

       *गीतिका छंद में - मॉं शारदे वन्दना*
शारदे मॉं ! शारदे मॉं !  नित नवल उद्गार दे। 
धार दे मेरे कलम में, सुर में शृंगार दे।।
शारदे मॉं ! शारदे मॉं ! नित नवल उद्गार दे... 
आग है मेरे हृदय में, कुछ नवल सुविचार लूँ। 
पास आकर अब तुम्हारे, चरण के रज सार लूँ।। 
कल्पना आँधी चली है, सफलता साकार दे। 
शारदे मॉं ! शारदे मॉं ! नित नवल उद्गार दे।। 1।। 
आज तेरे शुचि चरण में, भेंट अर्पण क्या करूँ। 
दो मुझे शुभकामनाएँ, निज समर्पण क्या करूँ।। 
भावना की जोत जलकर, तम हृदय अंगार दे। 
शारदे मॉं ! शारदे मॉं ! नित नवल उद्गार दे।। 2 ।। 
क्लान्त हूँ मॉं सो गई मम, दग्ध मन की भावना। 
प्रेम निर्मल उर बसे मॉं, है यही बस कामना।। 
जागते अवरुद्ध स्वर में, लय सुरों की धार दे। 
शारदे मॉं ! शारदे मॉं ! नित नवल उद्गार दे।। 3 ।। 
वन्दना कैसे करूँ मैं, स्वर नहीं तो क्या करूँ। 
बैठ उपवन कोकिलाएँ, गान करतीं सुर भरूँ।। 
मातु मेरे सौम्य उर में, शब्द का झंकार दे। 
शारदे मॉं ! शारदे मॉं! नित नवल उद्गार दे।। 4 ।।
आज ऊषाकाल मंगल, गान करने आ रहे।
सूर्य भी संसार जीवन, दान करने आ रहे।।
कनक घट में ज्योति मञ्जुल, तेल की शुचि धार दे। 
शारदे मॉं! शारदे मॉं! नित नवल उद्गार दे।। 
               000
डॉ.अशोक आकाश
ग्राम कोहंगाटोला बालोद 
छत्तीसगढ़
मो.नं.9755889199
सृजन दिनॉंक
23 अक्टूबर 2025



No comments:

Post a Comment