Sunday, December 14, 2025

मनहरण घनाक्षरी- सुख देना हो तो हमें

मनहरण घनाक्षरी

सुख देना हो तो हमें, इतना दे देना प्रभु, 
जीवन में कभी हमें, गर्व का न भाव हो।

और दुख देना हो तो, इतना खयाल रहे, 
प्रभु तेरे चरणों से, पल न दुराव हो।। 

बोलूँ नहीं ऐसे बैन, छीने जो किसी का चैन, 
मुझसे किसी का नैन, बहे मन घाव हो।
 
अशोक आकाश कहे, वही तो विकास गहे, 
जीवन हो कर्मशील, मन सदभाव हो।

अशोक आकाश
7/11/2025

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