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परीक्षा के रिजल्ट आगे यहू साल रज्जू हा बढ़िया नंबर लइस, बिपत के बेरा में धीरज रखना चाही , जिनगी अमोल हे जवैया हा चल दिस तब जीयैया ला अपन काम जरूर पूरा करना चाही | हाई स्कूल हा गॉव ले छै किलोमीटर दुर्हिया रीहिस, संगवारी मन संग जाके रज्जू नौवीं में भर्ती होगे | अब रोज बिहनिया अपन सबे काम ला करके स्कूल जाय अउ संझा घर आय तब सब काम बुता निपटाके पढ़े ल बैठे | हप्ता भर में रज्जू करियागे, गौटनिन दाई सब ला जानत रीहिस रज्जू ला एक दिन कीहिस ---
"जब ले मोर नोनी शिखा के बिहाव होय हे बेटी, ये साइकिल हा माड़े हे, आज ले तें इही में स्कूल जाबे , मन लगा के पढ़ बेटी अउ जिनगी के सुग्घर रद्दा गढ़ |"
नवा टायर ,घंटी ,फुंदरा , तारा लगे चुक चुकले नवा दुलहिन बरोबर सजे साइकिल ला देखके रज्जू खुश होगे, फेर कीहिस --
"एकर कोनो जरूरत नई हे दाई में तो दौंडत चल देथों तभोले बतादे एकर के पैसा दुहं |"
तब गौटनिन दाई कीहिस ---"में कोनो बैपार करथों वो , तोला पैसा में दुहूं |"
अउ तीर में जाके ओकर मुड़ी में हाथ फेर के अपन छाती में ओधैस अउ कीहिस ---"माड़े माड़े सबे खराब होगे रीहिस बेटी तोरेच बर एला बनवाय हौं, लेजा एमा स्कूल जाबे तब मोरो मन माड़ही |"
तब रज्जू हा ओला पोटार के कीहिस ---"में हा तोर ये सब करजा ला कब छूटहूं दाई |"
रज्जू बर साइकिल सूरज चंदा ले कम नई रीहिसे,जेकर सपना तक पहाड़ लागे , तेहा गौटनिन दाई के किरपा ले मिलगे | अब सबे काम , बुता , पढ़ई बेरा में हो जाय |
नौवीं कक्षा में रज्जू के अभिभावक के रूप में गौंटनिन दाई के नाम लिखा राहय | एक दिन ओकर स्कूल के प्राचार्य आके गौटनिन दाई के घर मेर रुकके पूछिस ---"रज्जू घर में हे का |"
तब गौटनिन दाई के बेटा कीहिस "ओकर घर तो वहा मेर हे आप मन बैठो मेंहा अभी बलवा देथों |" अउ लइका मन ला भेजके तुरते बलवा दिस | चाय पानी के पीयत ले रज्जू अंगरी फोरत आगे | दुर्हिया ले अपन स्कूल के प्राचार्य ला चिन्हके प्रणाम सर कहिके गोड़ छूके पॉव परीस तब गुरूजी गॉव के सकेलाय मैनखे मनला बतात कीहिस " हमन एक ठन खुशखबरी देय बर आय हन, हमर विधायक के अनुशंसा ले तुंहर गॉव के ये होनहार बेटी रज्जू के चयन सरकारी खरचा में शहर के बड़का स्कूल में पढ़े बर होगे हे जेमे छात्रवृति तक मिलही |"
अतका सुनके रज्जू चहकगे अउ ताली पीटत कूदत अपन खुशी व्यक्त कर डरीस | फेर अपन भाई बहिनी के सुरता आते भार बुझाय दिया बरोबर रुऑसू होके कीहिस ----
"नहीं सर मेंहा कहूंचो पढ़ेला नई जॉव, मोर नान नान भाई बहिनी मनके का होही |"
तब गौटनिन दाई के बेटा हा तुरते विधायक ला फोन लगा के कीहिस --- "विधायक महोदय रज्जू के नान्हे नान्हे भाई बहिनी के तक कुछू बेवस्था कर देतेव ताकि तीनो झन एके जगा रहिके अपन जिनगी के रद्दा गढ़ सके |"
विधायक महोदय ला रज्जू के जिनगी के उतार चढ़ाव मालूम रीहिसे तुरते कीहिस ---"मोला सब मालूम हे दाऊजी मेंहा ऊंकरो मन के व्यवस्था कर डरे हंव | तुंहर गॉव के ये होनहार लइका ला तुमन सम्मान पूर्वक शहर भेज देव, बाकी सब व्यवस्था ला मेंहा देख लेहूं |"
अब बिहान दिन गॉव के सरपंच, पटेल, ग्राम प्रमुख गौटनिन दाई अउ ओकर बेटा के संग मा गॉव भर के मैनखे जुरियाय रज्जू ओकर बहिनी अउ भाई ला पढ़े बर शहर के बड़का स्कूल में अमराके आगे |
आज बारा बछर होगे.....
शेष भाग 5 पर...
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