(2)
अब रज्जु दिन रात एक कर के पढ़ई अउ खेल प्रतिभा निखारे के प्रयास में लगगे, रोज बिहनिया खेल के अभ्यास अउ बाकी बेरा पढ़ई अउ घर काम में अपन मॉ के संग देय |
एक दिन मोर संगवारी राधे अक्करहा दौंड़त हमर घर अइस, खैरपा ला भड़ाक ले पेलके परछी में ले दे रुकिस तभो ले पठेरा के भितिया में ओकर मुड़ी लागिच गे | भड़ -भड़, भड़-भड़ भड़ाकले के बजई में हमर घर कोहराम मचगे, सब कोई जतर कतर दौड़त अइन अउ पूछिन का होगे , काये बाजिसे ते हा ,ओ मन सब सोचत रीहिन "बछवा हा फेर खूंटा ला टोर दिस |" ओतका बेरा मेहा बासी खात रेहेंव, राधे के ऐसन दौड़त आवई ला देख के महूं हा हड़बड़ा गेंव, मुहूं के कॉवरा मुहूं में | राधे हफरत हफरत अपने बताइस ---
"रज्जू घर बड़ मैनखे सकेलाय हे , मोला तो ओकर दाई मरगे तैसे लागथे !"
तुरते हाथ ला अंचो के जैसे राधे दौंड़त आय रीहिसे तैसने महूं हा सरपट दौंडत रज्जू घर गेंव, मोर पीछू राधे, ऐसने पूरा गॉव सकेलागे | आठवी के वार्षिक परीक्षा के पहिली ओकर दाई के तबीयत खराब होगे रीहिस, अस्पताल में पॉच छै दिन भर्ती रहे निर्मला रात दिन गोली दवई के बाद भी नई बॉचिस | रज्जु के जीवन में दुख के पहाड़ गिरगे , महतारी के मौत हा रज्जू ला पथरा बना दिस, अपन पास के एक झन बहिनी अउ छोटे भाई के बोझा अब रज्जू ऊपर आगे , ओमन ला पोटारे रज्जु अपन महतारी ला मरघट्टी लेगेे के तैयारी ला देख रीहिस | विधाता द्वारा पटके ये दुख के पहाड़ ला सगा सोदर पारा परोस अउ गॉव भर के मन महसूस करता रीहिसे | जे देखिस, सुनिस तेकरो मुहूं सुखागे, सबे मन एक दूसरा ला काहय अब का होही ये लइका मन के |
स्कूल में शोक श्रद्धांजलि के बाद छुट्टी करेगिस, तहॉले हेडमास्टरिन, गुरूजी अउ स्कूल के लइका मन सब के सब रज्जू घर अइन | मुड़ी धरे मुड़सरिया में बैठे एक टक अपन दाई के पींवरा परे मुहूं ला देखत रज्जू हुरहा गुरूजी अउ लइका मन ला देख परिस त पहाड़ कचारे बरोबर बोमफारके रो डरिस, काकरो मन धीर नइ धरिस सब रो डरिन, ये बेरा पूरा घर चिरोबोरो रोवई में गूंजगे | बड़े मेडम हा रज्जू ला ढाढस बंधावत कीहिस --
" तें फिर झन कर बेटी हमन तोर संग हन , अपन आप ला अकेल्ला झन मान हमन सब डाहन ले तोर सहयोग करबो | "
अउ अपन पर्स ले अब्बड़ अकन रुपिया निकालके रज्जू के हथेली में रख दिस | बड़े मेडम के बात ला सुनके डारा ले गिरे बेंदरी के पीला जैसे अपन माईं ले लिपट जथे तैसने रज्जू हा बड़े मेडम संग लिपटगे, ये बेरा तो मेडम हा तक गोहार पारके रो डरिस, अबतो एकबेर फेर चिरोबोरो रोवइ में पूरा घर गूंजगे |
रज्जु के मॉ के तिजनहावन कार्यक्रम के दिन हमर मन के पहिली पेपर हिंदी रीहिस | बड़े मेडम हा रज्जू बर ये पेपर ला बाद में देवाय के बेवस्था कर डरे रीहिसे | दुसरैया पेपर एक दिन के आड़ में रीहिस गुरूजी मन रज्जू ला मना भुरिया के ये पेपर ला देवाय बर तैयार कर डरीस | रज्जू हा अब जीवन के संघर्ष यात्रा बर तैयारी करके परीक्षा देवाय लागिस |
शेष भाग 3 पर...
No comments:
Post a Comment