कमल सिंहासन मे, देवी जी विराज के।
भवानी मैया जी लक्ष, असुर संहार दक्ष,
विषधर नाग भक्ष, धारे रूप बाज के।।
ममता मूरत भूप, करुणा वात्सल्य रूप,
पूजे वो न गिरे कूप, सूनो पूत आज के।
सर्व दुख निवारिणी, स्नेह रूप धारिणी हे,
अशोक आकाश मातु, धारे धर्म साज के।।
सृजन दिनॉंक
29/9/2025
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