समय का देख रुख, मुस्कान सजायें मुख,
मिले नित नेह सुख, मान न घटाये हैं।
वक्त की बिसात पर, बाजियॉं पलटकर,
भूल कर भी किसी का, दिल न दुखाये हैं।।
शक्ति संजोयें हैं ऐसी, मोड़ें धारा ऐसी वैसी,
मोम बन ढलने की, कला भी जगाये हैं।
दिल से शुक्रिया भाई, खोदते रहे जो खाई,
यूँ ऊँची छलॉंग हेतु, सामर्थ्य बढ़ाये हैं।।
डॉ.अशोक आकाश
12/3/2026
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