Thursday, March 26, 2026
सुम्मत के अंजोर (छत्तीसगढ़ी कहानी) राम्हेपुर गाँव विकास के नव गाथा गढ़त सुन्दर अउ शिक्षित परिवार वाले समृद्ध गॉंव रीहिस। जिहाँ तक नजर परे हरियर-हरियर खेत । ये गॉंव में अमीरी के शान रीहिस त गरीबी के ओतके इज्जत करैया मनखे मनके सहृदयता । ये गॉंव में अब्बड़ सुग्घर एक ठन जुन्ना घर रहिस जेकर नॉंव रीहिस शिवा सुमन निवास। ये घर शर्मा परिवार के रहिस, जिहाँ तीन पीढ़ी के मन एक संग रहत रहिन – शिवा शर्मा ओकर बाई सुमन शर्मा, ओखर बेटा रविन्द्र, बहू प्रियंका अउ आठ साल के नाती अर्पण। ये घर म हँसी-खुशी के माहौल रहिस, फेर कुछ दिन ले एमा दरार आवन लगिस । रविन्द्र अउ प्रियंका के बीच छोटे-छोटे बात म झगरा होवन लगिस, अउ ओखर मन के कड़वाहट धीरे-धीरे पूरा घर ला अपन चपेट म लेवत रहिस। दादाजी जऊन शांत स्वभाव के रहिन, ए सब ला देख के बहुत दुखी रहिन, फेर ओखर मन ला समझ नइ आवत रहिस कि का करँव। एक साँझ, रविन्द्र अउ प्रियंका कोनो बात बर फेर लड़ाई होवत रीहिस। अर्पण अपन दाई-ददा ला लड़त देखत रहिस, ओला बहुत खराब लागत रहिस। ओ अपन दादाजी करा गिस, जऊन बाहिर के बरामदा म बइठ के सुरुज ला बूड़त देखत रीहिस । अर्पण ओखर ले पूछिस- "दादाजी, दाई-ददा हमेशा काबर लड़थे? का हमर घर टूट जाही ?" दादाजी अर्पण के मुड़ म हाथ फेरिस अउ गहिर साँस लिस- "नइ रे मोर बेटा, हमर घर नइ टूटे, कभू-कभू मनखे एक-दूसर ले कोनो बात के असहमति में लड़ भले जाथे, फेर मया हमेशा ओला वापिस ले आथे।" अगला दिन, दादाजी एक अनोखा तरीका अपनाइस, ओ रविन्द्र अउ प्रियंका दुनों ले कहिस कि ओला घर म कुछ बदलाव करना हे। ओ कहिस, "मैं चाहत हँव कि तुमन दुनों एक-एक ठन जुन्ना चीज चुनौ, जौन बेकार हे, जऊन ला तुमन घर ले निकालना चाहत हव, अउ फेर एक-एक ठन नवा चीज चुनौ जऊन ला तुमन घर म लाना चाहत हव।" रविन्द्र अउ प्रियंका पहिली तो हैरान होइन, फेर दादाजी के कहे मँ ओ मन मानगे। रविन्द्र अपन जुन्ना स्टडी रूम मँ परे, एक ठन टूटे कुर्सी ला निकाले के फैसला करिस, जऊन ओला हमेशा ओखर लंगड़ा होय के सुरता देवावत रहिस, जब रविन्द्र के पौर साल एक्सीडेंट में गोड़ टूटगे रीहिस, बहुत ईलाज के बाद ठीक होय रीहिस, फेर ये पीरा आज भी वो टुटहा कुर्सी ल देख के सुरता आ जावत रीहिस। दादाजी ओ ला बढ़ई करा लेगके बनवा के ले आनिस। प्रियंका रसोई ले एक ठन फूलकॉंस के जुन्ना अउ सुन्दर लोटा निकालिस, जेकर पेंदा में छेदा होगे रीहिस अउ ओला ओखर खराब मूड के सुरता देवावत रिहिस, दादा जी ओला कसेर करा लेगके टपरवा के ले आनिस, अउ बेटा बहू दूनो ला समझावत कीहिस--"घर हा सुम्मत के रद्दा में रेंगके ही स्वर्ग बन सकथे बेटा, जब कोनो जिनीस टूट फूट जथे त ओला टपरवा देबो या बदल देबो, लेकिन जब कोनो रिश्ता में दरार आथे त ओला टपरे के एके तरीका हे, एक दूसरा के प्रति विश्वास, धीरज अउ संयम के साथ एक दूसरा ला समझना अउ एक दूसरा के सहयोग करना। जीवन के सफर बहुत लम्बा हे बेटा, लड़त रहिबो त ये डोंगा बूड़ जही । जब जिनगी के नैया पार करना हे त सहयोग अउ मया के पतवार चाही, एला कभू नई छोड़ना हे, अउ न कभू टूटन देना हे। अब नवा चीज लाने के बारी रहिस । दादाजी सुझाव दिस कि ओ दुनों मिल के कुछ अइसे चुनव जऊन पूरा परिवार बर होय। बहुत सोचे के बाद, रविन्द्र सुझाव दिस कि एक ठन नवा बड़े डाइनिंग टेबल खरीदन, ताकि सबे झन संग बइठ के खाना खा सकन, प्रियंका सहमति जतइस, अउ कहिस कि हमन टेबल के ऊपर एक ठन सुग्घर झूमर घलो लगा सकत हन, ताकि घर म अंजोर अउ खुशी आए। जब नवा डाइनिंग टेबल अउ झूमर आगे, त पूरा घर के माहौल बदलगे । ओ मन सबो अब संग बइठ के खाना खावय त उही फुलकँसहा लोटा मँ पानी पीययँ अउ कुर्सी में बैठत रहिन। उदसहा घर में अब सुम्मत के अंजोर बगरगे रीहिस। रविन्द्र अउ प्रियंका अउ घर के सबे सदस्य हँसी खुशी घरू काम में एक दूसर के मदद करे लगिन। झूमर के अंजोर मँ ओखर घर पहिली ले ज्यादा सुग्घर शांत अउ अंजोर दिखत रिहिस। एक दिन, खाना खावत खानी दादाजी रविन्द्र ले कहिस, "देख बेटा, ये घर ईंटा अउ सीमेंट ले नइ बनय, ये मया अउ समझदारी ले बनथे। जब कोनो चीज टूटथे, त ओला फेंके के बजाय, सुधारे के कोसिस करना चाही। ऐसने कई बेर एक दूसर के विचार नई मिले से टकराव के स्थिति आ जथे, ऐसन बेरा में एक दूसरा के सम्मान करत सबे झन ला स्थिति के अनुरूप शांति से काम लेना चाही। तभे तो सुम्मत के अंजोर ले नानचुन घर हा घलो घर स्वर्ग बन जथे। " डॉ.अशोक आकाश ग्रा लोद 9755889199
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