जाके भाल चन्द्र सोहे, कंठ विष धारे देव,
डमरू बजावत ही, असुर संहारे हैं।
भूतन के नाथ प्रभु, जगत के तात आप,
हाथ जो पसारैं दुख, पल में निवारे हैं॥
भगति बढ़ावे मान, श्रद्धा से जो करे गान,
संकट मिटावे सभी, काज वो सँवारे हैं।
महादेव महिमा को, गावत 'अशोक' अब,
करे हैं आकाश' नाम, शिव ही हमारे हैं॥
महाशिवरात्रि महापर्व की अनन्त शुभकामनाएँ
डॉ.अशोक आकाश✍️
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