*अवसरवादी नेताओं के खोखले आदर्श पर घनाक्षरी*
बार बार का चुनाव, देख बाबा भीमराव,
नेता आप ही का नॉंव, दॉंव में लगाते हैं।
प्रलोभन बिना पूर्ण, होता नहीं है चुनाव,
मदिरा की पेटी गॉंव, गॉंव में लुटाते हैं।।
संविधान ले के हाथ, कसमें तो बड़ी खात,
काम पड़े बात-बात, ताक पे सजाते हैं।
भीड़ में मसीहा बन, फोटो खिंचवाते तन,
घर जा के वही रंग, अपना दिखाते हैं।।
सिद्धांतों की लाश लॉंघ, शर्त कुर्सियों की बॉंध,बंदरों सी डाल-डाल, कूद दल बदले।
बेचकर स्वाभिमान, बने कुछ तो महान्
अवसर पाके ये तो, अपनी आत्मा छले।।
देते एक मुट्ठी चने, विडियो हजार बने, बेबस गरीब गिने, जश्न ये मनाते हैं।
एक केला दस थाम, फोटो खिंचे राम-राम!
रोज ये मदद नाम , रोटी सेंक जाते हैं।।
दान का ढिंढोरा पीट, हीरो करे गीज-गीज।
निष्ठा कौड़ी बेच-बेच, दल बदलाते हैं।।
दुखिया के साथ खड़े, हॉंस सेल्फी लेते बड़े,
डींग मार भाषण में, ताली बजवाते हैं।।
डॉ.अशोक आकाश
ग्राम कोहंगाटोला बालोद छत्तीसगढ़.
9755889199
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