गीत: स्वजन स्वीकार करो संदेश
मुखड़ा:
स्वजन स्वीकार करो संदेश, स्वजन स्वीकार करो संदेश।
जब मेरे आँगन में गूँजी, इस बिटिया किलकारी।
तब मेरी बगिया में महकी, नित नित नव मधुरिम क्यारी।।
अब मेरे ये प्राणदीप जा रही पिया के देश...
स्वजन स्वीकार करो संदेश...
अंतरा 1:
उँगली थामी सिसक-सिसक कर, चलना जिसे सिखाया।
आज वही बिटिया रानी ने, पराया देश बसाया।।
बाबुल की गलियां सब छूटीं, छूटा सुंदर वेश।
स्वजन स्वीकार करो संदेश...
अंतरा 2:
बचपन के वो खेल खिलौने, आँगन की वो क्यारी।
छोड़ चली तू लाडो अपनी, सखियाँ प्यारी-प्यारी।।
पिया नगर में सुख तुम पाना, तजकर सारा क्लेश।
स्वजन स्वीकार करो संदेश...
अंतरा 3:
जिस घर की तू लक्ष्मी बनकर, पली बढ़ी सुख पाकर।
उस घर को भी स्वर्ग बनाना, पावन प्रीत जगाकर।।
मर्यादा की जोत जलाना, तजकर मद लवलेश।
स्वजन स्वीकार करो संदेश...
अंतरा 4:
सदा सुहागन रहो लाड़ली, आशीषों की माला।
पीहर और ससुराल पक्ष में, चमके सदा उजाला।।
महके उपवन जीवन का यह, जैसे
स्वजन स्वीकार करो संदेश...
डॉ.अशोक आकाश
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