Wednesday, May 13, 2026

माता पिता को समर्पित मन हरण घनाक्षरी

मदर्स डे पर मॉं को समर्पित *मनहरण घनाक्षरी*
​ममता का बैंक माँ है,बच्चों पे लुटाती जॉं है,दुख छॉंटे सुख बाँटे, मिलता सुकून है।
पिता क्रेडिट कार्ड सा,बच्चों के वो गार्ड सा,इनके सपन हेतु, लड़ना जुनून है।।
​मौत को पछाड़ देता,कीलों को उखाड़ देता,लुटा देता खुद को ही,प्यार का प्रसून है।
संकट की धूप में भी,गिरे सुत कूप में भी,माता-पिता की शरण, सोता ये बिधुन है।।१।। 
पूंजी है मॉं की अटूट, ममता है कूट-कूट,बिना कहे समझे जो, बदन की पीर को। 
सह के भी कष्ट भारी,उफ न कहे बेचारी,मॉं बाप पसीना सींचे, भाग्य की लकीर को।।
छाती तान रहे खड़े,हिमालय जैसे अड़े,मोड़ देते पल में ही,वक्त के भी तीर को।
नमन है बार-बार,श्रद्धा सुमन हजार,वन्दन है नित्य ऐसे, पिता रणधीर को।।२।। 
डॉ.अशोक आकाश
१०/५/२०२६

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