Wednesday, January 7, 2026

छत्तीसगढ़ की जगन्नाथपुरी -: शिवरी नारायण

*छत्तीसगढ़ की जगन्नाथपुरी-: शिवरी नारायण*

         शिवरीनारायण छत्तीसगढ़ का मुख्य तीर्थ स्थल है इसे छत्तीसगढ़ की जगन्नाथपुरी भी कहा जाता है। जो मान्यता विश्व स्तर में पूरी के जगन्नाथ धाम को प्राप्त है वही मान्यता हमारे छत्तीसगढ़ में शिवरीनारायण को प्राप्त है। प्राचीन काल में भगवान जगन्नाथ जी तीनों विग्रह के साथ यही विराजमान रहे, किंतु कालान्तर में उन तीनों विग्रहों को जगन्नाथपुरी ले जाया गया। शिवरीनारायण का यह धार्मिक स्थल छत्तीसगढ़ के जन-जन में आस्था का केंद्र-बिंदु है। कहा जाता है कि यहाँ भगवान जगन्नाथ गुप्त रूप में निवास करते हैं। भगवान जगन्नाथ स्वामी के प्रति हम छत्तीसगढ़ियों की आस्था का प्रतिफल है यहॉं दूज डोल यानी रथ दूज छत्तीसगढ़ का मुख्य त्यौहार है ।

         शिवरीनारायण जांजगीर जिले में आता है लेकिन वास्तविकता यह है कि जांजगीर चॉंपा शिवरीनारायण जैसे धार्मिक आस्था की नगरी के कारण भी चर्चित है। शिवरीनारायण धाम हिंदुओं के धार्मिक आस्था के प्रतीक चार धाम उत्तर में बद्रीनाथ, दक्षिण में रामेश्वरम, पूर्व में जगन्नाथ पुरी और पश्चिम में द्वारिका धाम की तरह ही एक धाम है जो कि छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से 120 किलोमीटर की दूरी पर महानदी अर्थात चित्रोत्पला, शिवनाथ नदी और जोंक नदी के संगम स्थल पर स्थित है। इसे छत्तीसगढ़ के प्रमुख तीर्थ स्थल के रूप में जाना जाता है। यहॉं भगवान श्री राम वनवास के दौरान माता सीता के हरण हो जाने के बाद भाई लक्ष्मण के साथ माता सीता को वन-वन ढूंढते हुए पहुँचे थे। माता शबरी अपने गुरु मतंग ऋषि की आज्ञानुसार रोज भगवान श्री राम के आने की बाट जोहती, रास्ता साफ कर रंगबिरंगे फूल बिछाती भगवान श्री रामचंद्र जी का स्वागत और भोजन का रोज प्रबंध करती। 

         माता शबरी की साधना और तपस्या के फलस्वरुप भगवान श्री राम जी को मतंग ऋषि की भविष्यवाणी को सार्थक करने एक दिन आना ही पड़ा। भगवान  राम को देख माता शबरी भावविह्वल होकर अपने जूठन  बेर खिलाती रही और भक्त वत्सल भगवान अपने भक्त के प्रेम के वशीभूत हो जूठे बेर खाते रहे । यह स्थान भक्त की दृढ़ आस्था और भगवान की अतिवात्सल्यता के प्रतीक के रूप में जाना जाता है। 

            माघ पूर्णिमा और दूज डोल यानी रथदूज यानी रथ यात्रा यहाँ का मुख्य पर्व है। माघी पूर्णिमा में 3 दिन का पारंपरिक मेला स्नान दान पुण्य और उपासना से हिन्दुत्व का जयघोष होता है, छत्तीसगढ़ के कोने कोने से लोग यहॉं पहुँचते हैं। 
   
        शिवरीनारायण अपनी धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत के साथ-साथ फल फूल रहा है इसे राज्य शासन द्वारा धर्मनगरी घोषित कर दिया गया है, लेकिन हिंदुओं की आस्था का केन्द्रबिंदु यह नगरी शबरी की तरह आज भी उस राम का बाट जोह रही है जो उसे विकसित शहर की श्रेणी में रख सके। अनन्य आस्था लेकर पहुँचे लोगों को यह सामान्य शहर की तरह ही लगता है। यह धर्मनगरी उपेक्षित शहर की तरह अव्यवस्था का शिकार है, मंदिर स्थल पर पहुंचने में दिक्कतों का सामना करना पड़़ता है ।  प्रशासनिक चुश्ती की कमी के कारण यहॉं घाटों की साफ-सफाई एवं गलियों में कूढ़ों का ढ़ेर दर्शनार्थियों की आस्था पर चोट पहुँचाती है। 
    
         भगवान राम वन गमन पथ को विकसित करने में राज्य सरकारों ने बड़ा काम किया है लेकिन जन सहयोग की कमी और राजनीतिक इच्छा शक्ति का अभाव झेलती यह धर्मनगरी विकासपथ पर अग्रसर होने में अब भी असमर्थ है। इस हेतु स्थानीय संगठनों एवं निवासियों की सक्रियता जरूरी है ताकि शिवरीनारायण की उज्ज्वल कीर्ति अखिल विश्व में फैल सके। 

          छत्तीसगढ़िया रीति नीति के लिए चर्चित  यह तीर्थ स्थल अपने मंदिरों की निर्माण कला, भव्यता एवं चमत्कृत कर देने वाले नक्काशी के कारण विश्व प्रसिद्ध हो सकता है। यहाँ का राम नाम बैंक विश्व प्रसिद्ध है, भगवान श्री राम के भक्तों द्वारा लिखी गई राम नाम पत्रिका का विशाल संग्रह दर्शनीय है। महंत रामसुंदर दास एवं मंदिर ट्रस्ट की सक्रियता और दर्शकों के लिए पर्व विशेष पर समय-समय पर की जाने वाली व्यवस्था हमारी छत्तीसगढ़िया संस्कृति को पुष्पित पल्लवित एवं सुरभित कर रही है। 

              शिवरीनारायण जैसा रमणीय एवं दर्शनीय स्थल सिर्फ छत्तीसगढ़ तक की सीमित कर दिया गया है, यह पीड़ा का विषय है। हमारे छत्तीसगढ़ में निवासरत लोग देश के विभिन्न धर्म स्थलों में भ्रमण कर स्नान दान कर पुण्य प्राप्त करता है लेकिन हमारे छत्तीसगढ़ की धर्म नगरी राजिम, शिवरीनारायण आदि जगहों में देश के अन्य भागों से बहुत कम लोग दर्शन हेतु पहुंचते हैं, यह सोचनीय मुद्दा है। 

           राज्य सरकार को चाहिए कि हमारे छत्तीसगढ़ में आस्था के केंद्र-बिंदु रहे इन धर्म स्थलों का राष्ट्रीय स्तर पर प्रचार प्रसार हो ताकि ये धर्मस्थल लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र-बिंदु बने। विशिष्ट योजनाओं के साथ हमारी सांस्कृतिक विरासतों एवं हमारे सांस्कृतिक धरोहरों की ख्याति विश्व तक पहुँचे ऐसा प्रयास करने की आवश्यकता है। 

           शिवरीनारायण नगरी हर युग में अपने अलग-अलग नामों के साथ वैश्विक पहचान बनाती रही है , सतयुग में इसे बैकुंठपुर,त्रेता युग में रामपुर, द्वापर युग में विष्णुपुर एवं नारायणपुर के नाम से इन्हें ख्याति मिली थी। मतंग ऋषि के गुरुकुल आश्रम और माता शबरी की तप:स्थली, भगवान जगन्नाथ का निवास स्थान होने के कारण इसे तीर्थ का दर्जा प्राप्त है इस पावन पुण्य स्थली को विश्व विख्यात करने की जरूरत है। 

डॉ. अशोक आकाश
९७५५८८९१९९

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